Raebareli News: रायबरेली में अवैध कोचिंग सेंटरों का जाल, 250 में से सिर्फ 18 का रजिस्ट्रेशन, मासूमों की जिंदगी राम भरोसे

Raebareli Coaching Centers New: रायबरेली में 250 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हैं, लेकिन केवल 18 का ही रजिस्ट्रेशन है. फायर सुरक्षा की स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां महज एक संस्थान के पास फायर एनओसी है. ऐसे में हजारों छात्र बिना सुरक्षा इंतजामों के रोजाना जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं.

रायबरेली में अवैध कोचिंग सेंटरों का जाल, 250 में से सिर्फ 18 का रजिस्ट्रेशन, मासूमों की जिंदगी राम भरोसे

रायबरेली में अवैध कोचिंग सेंटरों का जाल, 250 में से सिर्फ 18 का रजिस्ट्रेशन, मासूमों की जिंदगी राम भरोसे

Newzo

• 11:02 AM • 23 Jun 2026

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Raebareli News: लखनऊ की एक बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग में कई मासूमों की जान जाने के बाद भी रायबरेली का जिला प्रशासन और संबंधित विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है. क्या रायबरेली प्रशासन भी किसी बड़े और हृदयविदारक हादसे का इंतजार कर रहा है? 

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बता दें की जिला मुख्यालय से लेकर तहसील और ब्लॉकों तक में बिना रजिस्ट्रेशन और बिना फायर सुरक्षा के धड़ल्ले से 'मौत की दुकानें' यानी अवैध कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं. आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली है. जिले भर में लगभग 250 से ज्यादा छोटी-बड़ी कोचिंगें चल रही हैं, लेकिन सरकारी कागजों में महज 18 कोचिंग सेंटर ही रजिस्टर्ड हैं. यानी 230 से ज्यादा कोचिंग सेंटर पूरी तरह अवैध रूप से सिस्टम की नाक के नीचे फल-फूल रहे हैं.

सिर्फ एक के पास फायर NOC, बाकी भगवान भरोसे

सबसे गंभीर और चिंताजनक बात यह है कि इन ढाई सौ से अधिक कोचिंग सेंटरों में से महज एक कोचिंग संचालक ने ही फायर ब्रिगेड से एनओसी (No Objection Certificate) लेने की जहमत उठाई है. शहर के डिग्री कॉलेज चौराहे की तंग गलियों से लेकर वीआईपी इलाकों तक, हर गली-कूचे में कोचिंगों का बोलबाला है. कमर्शियल भवनों के बेसमेंट और बिना वेंटिलेशन वाले कमरों में चल रही ये कोचिंगें सीधे तौर पर सरकारी दावों की कलई खोल रही हैं. इन सेंटरों में एक-एक बैच में 100 से लेकर 1500 तक बच्चे बेहद संकरे कमरों में बैठकर पढ़ रहे हैं. अगर खुदा न खास्ता कोई अनहोनी हो जाए, तो बच्चों को बाहर निकलने तक का रास्ता नहीं मिलेगा.

अधिकारियों के दफ्तर से चंद कदमों की दूरी पर खेल, फिर भी चुप्पी क्यों

हैरानी की बात यह है कि शहर के डिग्री कॉलेज चौराहे के आसपास ही करीब 20 से ज्यादा कोचिंगें बिना मानकों के चल रही हैं, जबकि वहाँ से चंद कदमों की दूरी पर ही तमाम जिला स्तरीय अधिकारियों के दफ्तर हैं. इस खेल में कोचिंग रजिस्ट्रेशन समिति भी शामिल है, जिसमें जिलाधिकारी (DM) से लेकर अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) सहित नौ आला अधिकारी मेंबर हैं. इसके बावजूद आज तक किसी भी अधिकारी ने इन अवैध सेंटरों की जांच करने की जहमत नहीं उठाई. दफ्तरों के बगल में नियमों की धज्जियां उड़ती रहीं और अग्निशमन विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक सब 'गांधारी' बने बैठे रहे।

 हादसे के बाद ही क्यों चेकिंग के नाम पर होती है खानापूर्ति

जनता का सबसे बड़ा और तीखा सवाल यह है कि आखिर हमारे जिम्मेदार अधिकारी हमेशा किसी बड़े हादसे के बाद ही क्यों जागते हैं? जब कहीं कोई बड़ा अग्निकांड हो जाता है, मासूमों की लाशें बिछ जाती हैं और चीख-पुकार मचती है, तब ही अधिकारी लाव-लश्कर लेकर सड़कों पर क्यों उतरते हैं? तब कुछ दिनों के लिए चेकिंग, सीलिंग और नोटिसबाजी का ऐसा नाटक रचा जाता है जैसे प्रशासन बेहद सख्त है, लेकिन हकीकत में यह सिर्फ जनता के गुस्से को शांत करने और कागजी कोरम पूरा करने (खानापूर्ति) का जरिया होता है। कुछ दिन बीतते ही मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है और 'लेन-देन' का खेल दोबारा शुरू हो जाता है.

अगर यही विभागीय अधिकारी समय-समय पर, ईमानदारी से इन कोचिंग सेंटरों की जांच करें, मानकों को कड़ाई से लागू करवाएं और अवैध रूप से चल रहे सेंटरों को पहले ही बंद करवा दें, तो किसी भी मां की गोद सूनी न हो और न ही ऐसी हृदयविदारक घटनाएं देखने को मिलें.