Raebareli Crime News: सूबे की सियासत में हमेशा सुर्खियों में रहने वाले वीवीआईपी जिले रायबरेली में एक बार फिर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. इस बार किसी रैली या बयानबाजी से नहीं, बल्कि शहर में रातों-रात चस्पा हुए कुछ पोस्टरों ने सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को निशाना बनाकर लगाए गए इन विवादित पोस्टरों ने शहर का माहौल गरमा दिया है.
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लाल टोपी पर वार, 'यादववाद' का तीखा प्रहार
शहर कोतवाली क्षेत्र के प्रमुख चौराहों और दीवारों पर लगे इन पोस्टरों में अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ बेहद तीखे और चुभने वाले संदेश लिखे गए हैं. सपा के सबसे बड़े नारे 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की हवा निकालते हुए पोस्टर पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है.
बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती, पोस्टर को 'पुख्ता' रंग देने के लिए विरोधियों ने इसमें पुरानी खबरों और सुर्खियों की कटिंग्स को भी प्रदर्शित किया है, जिसमें सपा शासनकाल के दौरान लगे आरोपों का जिक्र है.
अंधेरे का फायदा उठाकर शहर के दिल में लगाए गए इन पोस्टरों ने सुबह होते ही हलचल मचा दी. राहगीर रुक-रुक कर इन पोस्टरों को पढ़ रहे हैं और मोबाइल में तस्वीरें कैद कर रहे हैं. इस विवादित पोस्टर के सामने आने के बाद से ही शहर के चायखानों से लेकर सोशल मीडिया तक पर समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखी बहस (जुबानी जंग) छिड़ गई है. एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता इसे विरोधियों की घटिया और हताशा से भरी साजिश बता रहे हैं, वहीं विरोधी खेमा इसे सपा का 'असली चेहरा' करार दे रहा है.
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फिलहाल, शहर कोतवाली क्षेत्र के संवेदनशील इलाकों में लगे इन पोस्टरों को लेकर पुलिस और प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है ताकि शांति व्यवस्था न बिगड़े. लेकिन एक बात तो साफ है, इस 'पोस्टर बम' ने रायबरेली की शांत सियासी फिजां में एक बड़ा धमाका जरूर कर दिया है. अब देखना यह है कि सपा इस तीखे वार का 'पलटवार' किस अंदाज में करती है.
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