Raebareli News: जिले के सभी 980 ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया है. इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जब वर्तमान प्रधानों को ही उनके गांवों का प्रशासक नियुक्त किया गया है. हालांकि, प्रशासकों को ये अधिकार कुछ कड़े संशोधनों और शर्तों के साथ दिए गए हैं. अब कोई भी प्रधान (प्रशासक) बिना जिलाधिकारी (डीएम) की अनुमति के गांव में किसी भी तरह का नवीन यानी नया कार्य नहीं करा सकेगा. नए विकास कार्यों को शुरू कराने के लिए उन्हें जिला पंचायती राज अधिकारी (डीपीआरओ) के माध्यम से डीएम से औपचारिक अनुमति लेनी अनिवार्य होगी.
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क्यों टले पंचायत चुनाव?
निर्वाचन विभाग ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियां लगभग पूरी कर ली थीं. इसके तहत आखिरी कार्य के रूप में ओबीसी बोर्ड का गठन भी कर दिया गया था, लेकिन आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में करीब छह माह का समय लग सकता है. इसी दौरान प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल भी बज जाएगा, जिससे सभी अधिकारी और सरकार विधानसभा चुनाव की तैयारियों में व्यस्त हो जाएंगे. ऐसे में पंचायत चुनाव का आगे बढ़ना पूरी तरह तय माना जा रहा है. इसी के मद्देनजर सरकार ने प्रधानों को छह माह की अवधि के लिए प्रशासक बनाने का शासनादेश जारी कर दिया है, जिसके साथ ही उनके अधिकारों से जुड़े नियम व शर्तें भी तय कर दी गई हैं.
जहां पद रिक्त, वहां एडीओ संभालेंगे कमान
शासनादेश के अनुसार, जिन ग्राम पंचायतों में वर्तमान में प्रधान का पद किसी कारणवश रिक्त है, वहां एडीओ (पंचायत) को प्रशासक के रूप में नामित किया जाएगा.
नीतिगत फैसलों पर रोक, पुराने कार्यों का होता रहेगा भुगतान
नामित किए गए प्रशासक केवल सामान्य और अनिवार्य कार्यों का ही निर्वहन कर सकेंगे. प्रशासक द्वारा कोई भी नीति विषयक (बड़ा नीतिगत) निर्णय नहीं लिया जाएगा. अत्यंत आवश्यक होने पर वे डीपीआरओ के माध्यम से डीएम के समक्ष नया प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं. हालांकि, गांवों में पहले से संचालित या पूर्ण हो चुके विकास कार्यों का भुगतान प्रशासकों द्वारा पूर्व की भांति ही कराया जा सकेगा.
प्रशासक किसी भी नए कार्य को अपनी मर्जी से क्रियान्वित नहीं कर सकेंगे. केंद्र या राज्य सरकार द्वारा कोई नई योजना जारी होने पर भी, उसे गांव में संचालित करने के लिए डीपीआरओ के माध्यम से डीएम के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत कर स्वीकृति लेनी होगी.
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