Raebareli News: पहाड़ी इलाकों में हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में साफ देखने को मिल रहा है. गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने डलमऊ के कटरी क्षेत्रों में तबाही मचानी शुरू कर दी है. उफान मारती नदी के पानी में किसानों की लहलहाती फसलें डूबकर बर्बाद हो चुकी हैं, जिससे ग्रामीणों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खिंच गई हैं यदि जलस्तर में बढ़ोतरी का यह सिलसिला यूं ही जारी रहा, तो तराई के दर्जनों गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.
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सब्जियों व चारे की फसलें तबाहा, आजीविका पर गहराया संकट
गंगा के जलस्तर में रुक-रुक कर औसतन एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. शुक्रवार देर रात से अचानक बढ़े पानी ने आधा दर्जन से अधिक गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है. तराई इलाकों में किसानों द्वारा तैयार की गई परवल, करेला, भिंडी, कद्दू, लौकी और मवेशियों के हरे चारे की सैकड़ों बीघा फसलें पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं. फसलें तबाह होने से स्थानीय किसानों के सामने रोजी-रोटी के साथ-साथ मवेशियों को खिलाने के लिए चारे का भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है. कटान और जलभराव के खौफ से ग्रामीण रात-रात भर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं.
डलमऊ के स्नान घाट जलमग्न, गोताखोर तैनात
गंगा में आए उफान के कारण डलमऊ क्षेत्र के प्रमुख स्नान घाट पूरी तरह पानी में समा गए हैं. वर्तमान में चल रहे पवित्र सावन माह के कारण घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिन्हें बढ़ते जलस्तर के बीच जोखिम उठाकर स्नान करना पड़ रहा है. श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए प्रशासन ने घाटों पर गोताखोरों और पुलिस बल की मुस्तैदी बढ़ा दी है. घाटों पर पानी भर जाने से तीर्थ पुरोहित अपनी चौकी, तख्त और पूजन-सामग्री समेटकर सुरक्षित व ऊंचे स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं.
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