मथुरा, रजिस्ट्री के निजीकरण के विरोध में दूसरे दिन भी जारी रही हड़ताल, अधिवक्ताओं ने दिया समर्थन

Mathura Lawyers Protest: मथुरा की छाता तहसील में रजिस्ट्री व्यवस्था के निजीकरण के विरोध ने अब व्यापक रूप लेना शुरू कर दिया है. दस्तावेज लेखकों की हड़ताल को अधिवक्ताओं का भी समर्थन मिल गया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि निजीकरण से रोजगार प्रभावित होगा और आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है.

 Mathura News

Mathura News

Newzo

• 03:30 PM • 10 Jun 2026

follow google news

Mathura Lawyers Protest: रजिस्ट्री व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में दस्तावेज लेखक संघ की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही. आंदोलन को और मजबूती देते हुए छाता तहसील के अधिवक्ताओं ने भी दस्तावेज लेखकों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन किया.

यह भी पढ़ें...

क्या है पूरा मामला?

धरने के दौरान अधिवक्ताओं एवं दस्तावेज लेखकों ने संयुक्त रूप से उप जिलाधिकारी और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर रजिस्ट्री के निजीकरण के प्रस्ताव का विरोध जताया. उन्होंने कहा कि निजीकरण से आम जनता के साथ-साथ दस्तावेज लेखकों और अधिवक्ताओं के रोजगार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.

अधिवक्ताओं ने क्यों दिया समर्थन?

वक्ताओं ने सरकार से निजीकरण के निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो हड़ताल को आंदोलन का व्यापक रूप दिया जाएगा. इस दौरान बड़ी संख्या में अधिवक्ता, दस्तावेज लेखक एवं अन्य लोग मौजूद रहे और सभी ने एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया.

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

रजिस्ट्री व्यवस्था जमीन और संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों का आधार है. ऐसे में निजीकरण का मुद्दा सीधे लाखों लोगों, दस्तावेज लेखकों और अधिवक्ताओं को प्रभावित कर सकता है. इसलिए यह विवाद केवल रोजगार का नहीं, बल्कि सरकारी सेवाओं की कार्यप्रणाली और आम जनता की पहुंच से भी जुड़ा माना जा रहा है.