Raebareli News: जनपद में तेज़ी से हो रहे विकास कार्यों और प्राकृतिक संसाधनों के बढ़ते दोहन का असर अब पर्यावरण पर साफ दिखाई देने लगा है. हाईवे और एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से जिले की हरियाली लगातार कम हुई है. इसका परिणाम यह है कि रायबरेली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बढ़कर 97 तक पहुंच गया है, जिससे जिला 'ऑरेंज जोन' की श्रेणी में आ गया है.
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विशेषज्ञों का मानना है कि शुद्ध हवा की कमी और लगातार गिरता भूजल स्तर आने वाले समय में गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियां खड़ी कर सकता है.
हाईवे और एक्सप्रेसवे निर्माण में लाखों पेड़ों की कटाई
विभागीय सूत्रों के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण और बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के दौरान पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा है. लखनऊ-प्रयागराज हाईवे निर्माण के लिए जनपद क्षेत्र में करीब 50 हजार से अधिक पेड़ काटे गए. वहीं, रायबरेली से गुजर रहे 79 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए लगभग एक लाख वृक्षों की कटाई की गई. नियमों के तहत निर्माण एजेंसियों को प्रतिपूरक पौधरोपण करना अनिवार्य होता है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस दिशा में अपेक्षित कार्य नहीं हुआ, जिससे हरित क्षेत्र में लगातार कमी आई है.
सरेनी क्षेत्र में गहराया जल संकट
पेड़ों की कमी और अनियंत्रित भूजल दोहन का सबसे अधिक प्रभाव सरेनी क्षेत्र में देखने को मिल रहा है. यहां भूजल स्तर 145 फीट से अधिक नीचे पहुंच चुका है. वन क्षेत्र में कमी आने से स्थानीय मौसम चक्र भी प्रभावित हुआ है, जिसके कारण खेतों की नमी घट रही है और कृषि उत्पादन पर खतरा मंडरा रहा है.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो जिले में बंजर भूमि का दायरा बढ़ सकता है, जिससे खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित होगा.
पौधरोपण के दावों पर उठ रहे सवाल
एक ओर जहां पर्यावरणीय संकट गहराता दिखाई दे रहा है, वहीं वन विभाग अपने पौधरोपण अभियानों को सफल बता रहा है. विभाग के अनुसार वर्ष 2024-25 में जिले में 55 लाख से अधिक पौधे लगाए गए, जिनमें से 70 प्रतिशत जीवित हैं. वहीं वर्ष 2025-26 में 52 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया गया, जिनमें से 80 प्रतिशत के सुरक्षित होने का दावा किया गया है. हालांकि स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बड़ी संख्या में लगाए गए पौधे उचित देखरेख के अभाव में सूख गए हैं और वास्तविक स्थिति सरकारी आंकड़ों से अलग है. उनका कहना है कि कई स्थानों पर पौधरोपण केवल कागजों तक सीमित दिखाई देता है.
जिला वनाधिकारी (DFO) आशुतोष जायसवाल ने कहा कि वन विभाग पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है. उन्होंने बताया कि जनपद में व्यापक स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाया जा रहा है. इस वर्ष 47 लाख से अधिक नए पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसकी शुरुआत के तहत आज आठ हजार पौधों का रोपण किया जाएगा.
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