Raebareli Health News: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायबरेली ने चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में देश में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है. एम्स प्रशासन ने मरीजों की भारी मांग को देखते हुए संस्थान में 'पल्मोनरी विभाग' की ओपीडी विधिवत शुरू कर दी है, जिससे अब फेफड़े और सांस से संबंधित गंभीर रोगों से ग्रसित मरीजों को भटकना नहीं पड़ेगा. इसके साथ ही, संस्थान में स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 20 सीटों के साथ एमएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम की पढ़ाई भी शुरू कर दी गई है.
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एम्स रायबरेली में नई सुविधा
गौरतबल है कि रायबरेली और उसके आसपास के क्षेत्रों के बच्चों को अब तक उच्च स्तरीय एमएससी नर्सिंग की पढ़ाई के लिए दूसरे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था. एम्स में इसकी शुरुआत होने से स्थानीय और क्षेत्रीय छात्रों को यहीं पर विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त हो सकेगी. लगभग 9 माह पूर्व एम्स में निदेशक पद का कार्यभार संभालने वाली प्रो. डॉ. अमिता जैन ने स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने और शैक्षणिक विस्तार की इस जिम्मेदारी को तेजी से आगे बढ़ाया है.
हर दिन तीन से चार हजार तक की ओपीडी, इन जिलों को मिल रहा लाभ
एम्स रायबरेली में वर्तमान समय में प्रतिदिन तीन से चार हजार मरीजों की ओपीडी दर्ज की जा रही है, इस संस्थान का लाभ न केवल रायबरेली बल्कि इसके पड़ोसी जिलों जैसे अमेठी, प्रतापगढ़, कौशाम्बी, फतेहपुर, सुल्तानपुर, भदोही, और बाराबंकी समेत दर्जन भर जिलों से आने वाले गंभीर मरीज उठा रहे हैं. स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ एम्स बेहतरीन डॉक्टर भी तैयार कर रहा है. अब तक लगभग 350 छात्र-छात्राएं यहां से एमबीबीएस (MBBS) की परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर चुके हैं.
सीटों और इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ोतरी, इमरजेंसी सेवाओं में आएगी मजबूती
संस्थान से प्राप्त जानकारी के अनुसार, चिकित्सा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए एम्स प्रशासन द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. इसी क्रम में एमबीबीएस की सीटों में 25, पीडीएफ की सीटों में 8 तथा पीएचडी की सीटों में 5 सीटों का इजाफा किया गया है. वहीं, फैकल्टी की संख्या बढ़ाने के लिए एम्स प्रशासन निरंतर कसरत कर रहा है.
आपातकालीन सेवाओं को मजबूती देने के लिए एम्स में वर्तमान में एक दर्जन से अधिक ऑपरेशन थिएटर निरंतर संचालित हो रहे हैं. इमरजेंसी विभाग में भी समर्पित ओटी शुरू होने से अब गंभीर से गंभीर मरीजों को त्वरित और आपातकालीन इलाज मिल पा रहा है, जिससे डॉक्टरों को जटिल मामलों में जान बचाने में बड़ी सफलता मिल रही है.
पल्मोनरी ओपीडी किस डॉक्टर की देखरेख में चलेगी?
एम्स अधीक्षक डॉ नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि पल्मोनरी विभाग का कुशल संचालन डॉ. कृष्ण प्रिया कर रही हैं. इससे फेफड़े से संबंधित मरीजों को समुचित इलाज मिलना शुरू हो गया है. ग्राउंड फ्लोर पर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को इस विभाग की ओपीडी संचालित की जा रही है.
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एमएससी नर्सिंग में कितनी सीटें शुरू हुई हैं?
उधर एम्स निदेशक डॉ अमिता जैन ने बताया कि सरकार की मंशानुसार एम्स में 20 सीटों के साथ एमएससी नर्सिंग की पढ़ाई शुरू की जा रही है. इसके साथ ही पल्मोनरी विभाग की ओपीडी भी प्रारंभ हो गई है. एम्स में आने वाले रोगियों को बेहतर और अत्याधुनिक स्वास्थ्य चिकित्सा सेवाएं प्रदान करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है.
पल्मोनरी विभाग क्या होता है?
यह फेफड़ों और श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियों के इलाज का विभाग है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
पल्मोनरी विभाग की शुरुआत ऐसे समय में हुई है जब श्वसन और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. नई ओपीडी से आसपास के जिलों के मरीजों को विशेषज्ञ उपचार स्थानीय स्तर पर मिलेगा. वहीं एमएससी नर्सिंग कोर्स की शुरुआत क्षेत्र में स्वास्थ्य शिक्षा और प्रशिक्षित नर्सिंग पेशेवरों की उपलब्धता को मजबूत करेगी.
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