माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान के सुपुर्द-ए-खाक होने के बाद कसारी-मसारी कब्रिस्तान से लेकर मीडिया और सोशल मीडिया तक कई तस्वीरें और किरदार चर्चा में हैं. लेकिन इनमें से जिस शख्स की सबसे ज्यादा बात हो रही है वह है अतीक का दूसरे नंबर का बेटा अली अहमद. चार साल से जेल में बंद अली जब पैरोल पर अपने छोटे भाई को अंतिम विदाई देने कसारी-मसारी कब्रिस्तान पहुंचा तो उसकी बॉडी लैंग्वेज, मूछों पर ताव और पहनावे को देखकर लोगों को अतीक अहमद और उसके चाचा अशरफ की याद आ गई.हालांकि वहीं अपने बड़े भाई उमर से लिपटकर फूट-फूटकर रोते और छोटे भाई अजहम को संभालते अली का भावुक रूप भी देखने को मिला.
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4 साल बाद कब्रिस्तान पहुंचा था अली
झांसी जेल में बंद अली अहमद चार साल बाद प्रयागराज पहुंचा था. यह पहला मौका था जब वह अपने पिता अतीक, चाचा अशरफ और भाइयों की कब्रों के पास खड़ा था. कब्रिस्तान में अपने सबसे बड़े भाई उमर से लिपटकर रोते और कब्रों की तरफ इशारा करते अली की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं. वहीं बाल संरक्षण गृह से आए चौथे नंबर के भाई अजहम को चुप कराते और दुलारते भी उसे देखा गया.
झांसी जेल में खाना नहीं खा रहा अली
सूत्रों के मुताबिक, कब्रिस्तान से वापस झांसी जेल लौटने के बाद अली पूरी तरह टूट चुका है.6 अगस्त को जब अबान की सड़क हादसे में मौत हुई तब वह अली से मिलने ही झांसी जेल जा रहा था और उसके लिए किताबें ले जा रहा था. बताया जा रहा है कि अली जेल में गुमसुम है. वह ना कुछ खा रहा है और ना पी रहा है. अबान द्वारा दी गई किताबों को देखकर वह रह-रहकर रो पड़ रहा है और शायद खुद को इस हादसे के लिए कसूरवार मान रहा है.
जानिए अली अहमद का पूरा प्रोफाइल
अतीक के पांच बेटों (उमर, अली, असद, अजहम और अबान) में अली को शुरू से ही काफी एग्रेसिव और पढ़ाई में होशियार माना जाता था. अतीक और अशरफ के जेल में रहने के दौरान वही गैंग और साम्राज्य को संभालने में जुटा था. 2022 में करेली के प्रॉपर्टी डीलर जीशान उर्फ जानू से 1 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के आरोप में अली पर केस दर्ज हुआ था. 30 जुलाई 2022 से वह जेल में बंद है.
नैनी जेल का चेकिंग विवाद और सस्पेंशन
मई 2025 में जब नैनी सेंट्रल जेल में अचानक अधिकारियों का निरीक्षण हुआ तो अली की बैरक से नकदी और कुछ आपत्तिजनक सामान बरामद हुआ था. इस मामले में डेपुटी जेलर का देवी और जेल वार्डन संजय द्विवेदी को सस्पेंड कर दिया गया था.
फांसी बैरक से झांसी जेल शिफ्टिंग
नैनी जेल के इस वाकये के बाद अली को बेहद कड़े सुरक्षा घेरे वाली 'फांसी बैरक' में स्थानांतरित किया गया जहां 24 घंटे सीसीटीवी और सुरक्षाकर्मियों का पहरा रहता था. बाद में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उसे झांसी जेल शिफ्ट कर दिया गया जहां वह पिछले 11 महीनों से बंद है.
अली ने अपनी सुरक्षा को खतरा बताते हुए पेशी के दौरान सुरक्षा बढ़ाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. हालांकि दिसंबर 2023 में कोर्ट ने केवल काल्पनिक आशंका के आधार पर सुरक्षा देने से इनकार करते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी थी.
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