ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इन दिनों चर्चाओं में हैं. हाल ही में उन पर लगे कुछ आरोपों के बीच जब वे उत्तर प्रदेश के उन्नाव पहुंचे तो वहां स्वागत के लिए खड़े लोगों ने एक सुर में इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. लोगों का मानना है कि सनातन धर्म के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति पर इस तरह के लांछन लगाना न केवल निंदनीय है बल्कि एक गहरी साजिश का हिस्सा भी हो सकता है.
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आरोपों को बताया निराधार और षड्यंत्र
उन्नाव में मौजूद समर्थकों ने साफ कहा कि भारत एक गणतंत्र है और यहां कोई भी किसी पर आरोप लगा सकता है. लेकिन कानूनी प्रक्रिया में ये आरोप झूठे साबित हो रहे हैं. एक स्थानीय नागरिक ने कहा'जैसे ही ये आरोप लगे, समस्त सनातनी जनमानस ने इन्हें नकार दिया. हमें अपने शंकराचार्य पर अटूट विश्वास है और जो व्यक्ति आरोप लगा रहा है. वह कहीं न कहीं से प्रेरित और षड्यंत्रकारी है.'
"शंकराचार्य का दर्जा भगवान के समान"
स्वागत के लिए पहुंचे लोगों ने भावुक होते हुए कहा कि शंकराचार्य को समाज में भगवान का दर्जा दिया जाता है.उन्होंने उन संस्थानों के बारे में भी बात की जिन पर आरोप लगे थे.उन्होंने कहा कि वहां बच्चों को परिवार की तरह पाला जाता है. ऐसे में अनैतिक कार्यों या हमले की बात सोचना भी गलत है.
राजनीतिक दलों का समर्थन और गौ-रक्षा का मुद्दा
शंकराचार्य के स्वागत में केवल आम जनता ही नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में पहुंचे थे.सपा नेताओं ने कहा 'महाराज जी एक संयमित और नियमित जीवन जीते हैं. उनके ऊपर किसी भी प्रकार का अनैतिक आरोप लगाना घोर निंदनीय है.' इसके साथ ही लोगों ने 11 मार्च को लखनऊ में होने वाले 'गौ-रक्षा' आंदोलन के प्रति भी अपनी प्रतिबद्धता जताई.
सरकार पर साधा निशाना
भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब कुछ लोग जीत नहीं पाते तो वे पूजनीय संतों पर झूठे आरोप लगवाते हैं.उन्होंने कहा कि वे गुरु जी के साथ मजबूती से खड़े हैं और किसी भी निराधार आरोप का डटकर मुकाबला करेंगे.
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