पाइल्स ऑपरेशन की छुट्टी ना मिलने पर लोको पायलट राजेश मीणा ने पैंट उताकर दिखाया घाव, वायरल वीडियोो के बाद हड़कंप

लखनऊ रेलवे के लोको पायलट ने छुट्टी बढ़ाने के लिए अपनी बीमारी साबित कराना जरूरी समझा और अपने घाव दिखाने के लिए पैंट उतारी. अधिकारियों ने उनकी मेडिकल रिपोर्ट के बावजूद छुट्टी नहीं दी. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

अंकित मिश्रा

• 11:57 AM • 05 Mar 2026

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Lucknow Viral Video: सोचिए अगर आपको अपनी जायज बीमारी की छुट्टी मंजूर करवाने के लिए अपने ही बड़े अधिकारी के सामने कपड़े उतारने पड़ जाएं तो आप पर क्या गुजरेगी? सुनने में यह किसी फिल्म का सीन लग सकता है.लेकिन लखनऊ में तैनात लोको पायलट राजेश मीणा के साथ यह हकीकत में हुआ है. पाइल्स (बवासीर) की सर्जरी के बाद दर्द से बेहाल राजेश जब अपनी छुट्टी बढ़वाने पहुंचे तो सिस्टम की 'बेरुखी' ने उन्हें इस कदर मजबूर किया कि उन्होंने सरेआम अपना ऑपरेशन का घाव दिखाकर विरोध दर्ज कराया.

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लोको पायलट राजेश मीणा काफी समय से पाइल्स की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. आखिरकार 22 फरवरी को उन्होंने इसका ऑपरेशन करवाया. डॉक्टरों ने उन्हें बेड रेस्ट की सलाह दी थी और रेलवे की ओर से उन्हें 28 फरवरी तक की छुट्टी मिली थी. लेकिन जब दर्द कम नहीं हुआ और घाव नहीं भरा तो राजेश ने अपनी छुट्टी बढ़ाने की गुहार लगाई. राजेश का आरोप है कि जब वे चीफ क्रू कंट्रोलर ऑफिस पहुंचे तो अधिकारियों ने उनकी मेडिकल रिपोर्ट्स, डॉक्टरों की पर्ची और दवाइयों को देखने के बावजूद छुट्टी देने से साफ इनकार कर दिया. राजेश ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की कि इस हालत में ट्रेन चलाना न केवल उनके लिए बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है. लेकिन साहब टस से मस नहीं हुए.

जब दफ्तर में बैठे अधिकारियों ने उनकी एक न सुनी और बीमारी को मानने से इनकार कर दिया तो राजेश का सब्र टूट गया. गुस्से और लाचारी में उन्होंने कहा, 'आपको सबूत चाहिए न, तो लीजिए देख लीजिए.'इसके बाद उन्होंने अधिकारी के सामने अपनी पैंट उतार दी ताकि वे अपनी आंखों से ऑपरेशन का गहरा घाव देख सकें. वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया जो अब विभाग के लिए गले की फांस बन गया है.

सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा

वीडियो वायरल होने के बाद लोग रेलवे प्रशासन की जमकर आलोचना कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि अगर मेडिकल सर्टिफिकेट की कोई कीमत नहीं है और एक कर्मचारी को अपनी बीमारी साबित करने के लिए इस हद तक अपमानित होना पड़ रहा है, तो यह व्यवस्था की बड़ी विफलता है.