फिरोजाबाद में डेढ़ साल के आरव को पटक कर मारने वाले विराज पाठक को कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा...तो बच्चे की मां ने कही ये बी बड़ी बात!

यूपी तक

• 04:51 PM • 15 Jul 2026

Aarav Murder Case: फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में डेढ़ साल के मासूम आरव की हत्या के मामले में दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है.

Google CTA

Aarav Murder Case: फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में डेढ़ साल के मासूम आरव उर्फ जितेंद्र पाठक की हत्या के मामले में दोषी को अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है. फैसले के बाद भी बच्चे की मां का दर्द कम नहीं हुआ है. मां रति ने कहा कि उनका बच्चा अब कभी वापस नहीं आएगा, लेकिन वह आरोपी को भी जिंदा नहीं देखना चाहतीं.

यह भी देखें...

यह वही घर है जहां से 30 मई को आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक मासूम आरव को उसकी मां की गोद से टॉफी दिलाने के बहाने लेकर गया था. घर से करीब 50 से 60 फीट की दूरी पर सड़क पर उसने मासूम की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. इस मामले में पुलिस ने महज छह दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल कर दी थी. इसके बाद 9 जुलाई को अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया और 10 जुलाई को उसे फांसी की सजा सुनाई गई.

मां का दर्द- "मेरे बच्चे की कोई गलती नहीं थी"

आरव की मां रति ने कहा कि आरोपी भले ही अपनी गलती मान रहा हो, लेकिन उनके बच्चे की क्या गलती थी. उन्होंने कहा, "मेरे बच्चे की कोई गलती नहीं थी. उसकी सिर्फ इतनी गलती थी कि वह मेरा बच्चा था. उसने मेरी जिंदगी पूरी तरह खाली कर दी."

रति ने आरोप लगाया कि आरोपी पहले से ही उनके परिवार को जानता था और बदायूं से शिकोहाबाद आकर उसने पूरी योजना के साथ इस वारदात को अंजाम दिया. उनका कहना है कि इतनी बड़ी घटना बिना प्लानिंग के नहीं हो सकती.

मृत्युदंड के बाद भी मां की मांग- हर अदालत में मिले सजा

अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद भी रति संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि आरोपी अभी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाएगा, इसलिए वह चाहती हैं कि हर जगह उसकी सजा बरकरार रहे. उन्होंने कहा, "मेरा बच्चा वापस नहीं आएगा, लेकिन मैं उसे जिंदा नहीं देख सकती. तभी मुझे और मेरे बच्चे को न्याय मिलेगा."

मानसिक बीमारी के दावे पर मां ने उठाए सवाल

आरोपी विराज के परिवार की ओर से दावा किया गया है कि वह मानसिक रूप से परेशान रहता था और उसे दौरे पड़ते थे. इस पर आरव की मां ने सवाल उठाते हुए कहा कि जो व्यक्ति बदायूं से शिकोहाबाद आ सकता है, अपनी दुकान चला सकता है, कार और बाइक चला सकता है, वह मानसिक रूप से बीमार कैसे हो सकता है. उन्होंने कहा कि आरोपी ने वारदात को अंजाम देने के बाद भागने की कोशिश भी की थी, जिससे साफ है कि वह पूरी तरह से होश में था.

केस के दौरान परिवार को मिली धमकियां, पुलिस पर जताया भरोसा

आरव की नानी पिंकी ने बताया कि केस की सुनवाई के दौरान उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. उन्होंने बताया कि कोर्ट के बाहर कुछ संदिग्ध लोग नजर आए थे, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को जानकारी दी और पुलिस ने उनकी सुरक्षा की. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने तरह-तरह की बातें लिखीं, लेकिन परिवार ने हिम्मत नहीं छोड़ी.

आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाने की मांग

आरव की मां और नानी ने आरोपी के घर पर बुलडोजर कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि आरोपी की संपत्ति सरकार के कब्जे में ले ली जानी चाहिए.

रति ने कहा, "मुझे उसकी किसी संपत्ति का लालच नहीं है. उसकी सारी प्रॉपर्टी सरकार को मिलनी चाहिए. उसके मकान पर बुलडोजर चलना चाहिए."

पुलिस और न्याय व्यवस्था से परिवार संतुष्ट

आरव के परिवार ने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर संतोष जताया है. उनका कहना है कि पुलिस ने तेजी से जांच पूरी की और उन्हें न्याय दिलाने में पूरा सहयोग किया. परिवार ने मांग की है कि अब फांसी की सजा का जल्द से जल्द पालन किया जाए ताकि उनके बच्चे को वास्तविक न्याय मिल सके.

फिलहाल विराज जेल में है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है. आरव हत्याकांड ने एक बार फिर मासूम बच्चों की सुरक्षा और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत पर सवाल खड़े कर दिए हैं.