दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों को भोजन उपलब्ध कराने वाले मोहम्मद जुनैद के गाजियाबाद स्थित नाहल गांव के घर पुलिस पहुंची. पुलिस ने भोजन की व्यवस्था में इस्तेमाल हुए पैसों के सोर्स को लेकर परिवार से पूछताछ की. दूसरी ओर, जुनैद ने पुलिस पर उत्पीड़न और अवैध हिरासत का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है.
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परिवार से दो बार हुई पूछताछ
जुनैद के चचेरे दादा आफताब अली ने बताया कि पुलिस दो बार उनके घर पहुंची. पहली बार पुलिस जुनैद के पिता मुस्तफा को पूछताछ के लिए थाने ले गई थी. बातचीत के बाद उन्हें छोड़ दिया गया. अगले दिन पुलिस बैंक पासबुक और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज अपने साथ ले गई. इसके अलावा मेरठ में जुनैद की बहन के ससुराल पक्ष से भी पूछताछ की गई.
फंडिंग के सोर्स की जुटाई जा रही जानकारी
पुलिस यह जानकारी जुटा रही है कि प्रदर्शनकारियों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए पैसा कहां से आया. इस पर आफताब अली का कहना है कि जुनैद ने अपनी जेब से चार से पांच हजार रुपये खर्च किए थे. बाकी सहयोग उसके दोस्तों और अन्य लोगों ने किया. उन्होंने बताया कि कई लोगों ने नकद राशि देने के बजाय सीधे खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई थी.
पुलिस ने गिरफ्तारी के दावों से किया इनकार
वहीं, गाजियाबाद पुलिस अधिकारियों ने गिरफ्तारी के दावों का खंडन किया है. डीसीपी ग्रामीण जोन सुरेंद्रनाथ तिवारी के मुताबिक, जुनैद के पिता को केवल सामान्य पूछताछ के लिए मसूरी थाने बुलाया गया था. पूछताछ पूरी होने के बाद उन्हें वापस घर भेज दिया गया. जुनैद के पिता ने भी वीडियो जारी कर इस बात की पुष्टि की है.
सुप्रीम कोर्ट में लगाए गंभीर आरोप
जुनैद ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि 24 जुलाई की आधी रात दिल्ली पुलिस ने उन्हें पांच से छह घंटे तक गाड़ी में बंधक बनाकर रखा और बाद में सुनसान जगह पर छोड़ दिया. याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए उनके परिजनों को हिरासत में लिया गया. उन्होंने कथित प्रताड़ना पर रोक लगाने और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है.
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