मायावती ने आकाश आनंद को क्यों किया बाहर? परिवार के अंदर क्या चल रहा, पत्रकार सैयद कासिम ने बताया सबकुछ!

कुमार अभिषेक

12 Sep 2026 (अपडेटेड: 12 Sep 2026, 10:03 AM)

बहुजन समाज पार्टी में मायावती और उनके भतीजे आकाश आनंद के बीच चल रहा विवाद अब उनके ससुर और पार्टी के पुराने नेता अशोक सिद्धार्थ तक पहुंच गया है.

Journalist Syed Qasim on Mayawati Family Dispute

Journalist Syed Qasim on Mayawati Family Dispute (Photo: AI Generated)

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Mayawati Family Dispute: बहुजन समाज पार्टी में मायावती और उनके भतीजे आकाश आनंद के बीच चल रहा विवाद अब उनके ससुर और पार्टी के पुराने नेता अशोक सिद्धार्थ तक पहुंच गया है. आकाश आनंद को पार्टी से बाहर किए जाने और अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक-सामाजिक जीवन से अलग होने के बाद बीएसपी के अंदर की स्थिति को लेकर लगातार चर्चा हो रही है. एक राजनीतिक चर्चा में बीएसपी के जानकार और पत्रकार सैयद कासिम ने दावा किया कि मायावती के फैसलों के पीछे पार्टी के भीतर की शिकायतों और आकाश-अशोक से जुड़े घटनाक्रम की बड़ी भूमिका है. उन्होंने यह भी कहा कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इस विवाद का असर पार्टी के कार्यकर्ताओं और संभावित उम्मीदवारों पर पड़ सकता है.

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क्या इसलिए कम हुआ अशोक सिद्धार्थ का कद?

सैयद कासिम के मुताबिक अशोक सिद्धार्थ का पार्टी में कद काफी बड़ा रहा है. उन्होंने कहा कि अशोक सिद्धार्थ राज्यसभा जा चुके हैं और उत्तर प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों में भी संगठन की जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. कासिम ने दावा किया 'जब तक अशोक सिद्धार्थ आकाश आनंद के ससुर नहीं थे, तब तक उनका कद लगातार बढ़ रहा था. लेकिन रिश्ता होने के बाद से उनका कद कम होना शुरू हुआ और तीन बार उन्हें बाहर किया गया.' उनके मुताबिक बीएसपी में पहले भी बड़े नेताओं को लेकर ऐसे घटनाक्रम होते रहे हैं.

क्या किसी ने मायावती के कान भरे?

कासिम ने पार्टी में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद को लेकर भी सवाल उठाए. उनके अनुसार बीएसपी में राजाराम, रामजी गौतम और जयप्रकाश जैसे नेता राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके हैं, जबकि वर्तमान में आनंद कुमार इस पद पर हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी के संविधान और परंपरा को देखते हुए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद उत्तराधिकार की चर्चा से भी जुड़ता रहा है. हालांकि उन्होंने अशोक सिद्धार्थ द्वारा पार्टी पर कब्जे की किसी संभावित कोशिश को लेकर कहा कि मौजूदा संगठनात्मक ढांचे को देखते हुए ऐसा होना आसान नहीं है और इसे लेकर बनी धारणा 'भ्रम से अतिरिक्त कुछ नहीं' है.

एक अखबार की खबर और रीट्वीट से बढ़ा विवाद

राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक विवाद उस समय और बढ़ गया जब एक अखबार में अशोक सिद्धार्थ के उत्तर प्रदेश लौटने और प्रयागराज-लखनऊ मंडल की जिम्मेदारी संभालने से जुड़ी खबर प्रकाशित हुई. इसके बाद आकाश आनंद से जुड़ी एक पोस्ट को अशोक सिद्धार्थ की आईडी से रीट्वीट किए जाने की बात सामने आई. कासिम ने दावा किया कि इसके बाद बीएसपी के कई नेताओं और पदाधिकारियों ने आकाश आनंद को सोशल मीडिया पर अनफॉलो किया. उन्होंने इसे विवाद बढ़ने की अहम कड़ी बताया.

2027 चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं की चिंता बढ़ी

सैयद कासिम ने कहा कि आकाश आनंद युवा वोटरों के बीच पार्टी का एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरे थे. उनके मुताबिक कई संभावित उम्मीदवार इस बात को लेकर चिंतित हैं कि चुनाव में उन्हें किस स्टार प्रचारक का सहारा मिलेगा. उन्होंने कहा 27 का चुनाव सिर पर है. दूसरी पार्टियां तैयारी कर रही हैं और बहुजन समाज पार्टी में ट्वीट क्यों नहीं किया, क्या हुआ, क्या नहीं हुआ इन सब चीजों को लेकर कार्यकर्ताओं में चिंता है.' उन्होंने दावा किया कि मेरठ में दो और मऊ में एक व्यक्ति ने आकाश आनंद के समर्थन में इस्तीफा दिया है.

आकाश आनंद की वापसी पर क्या बोले?

आकाश आनंद के भविष्य को लेकर सैयद कासिम ने कहा कि उनका स्वभाव ऐसा नहीं दिखता कि वह अपनी बुआ के खिलाफ जाकर किसी दूसरी पार्टी में शामिल होंगे. उन्होंने बताया कि आकाश ने अपने सोशल मीडिया बायो में पहले खुद को वर्कर और बाद में समर्थक लिखा तथा रीट्वीट करना भी बंद किया. सैयद कासिम के मुताबिक फिलहाल उनकी वापसी आसान नहीं दिखती, लेकिन अगर मायावती और आकाश के बीच व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत होती है तो स्थिति बदल सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा नुकसान बीएसपी को हो रहा है और 2027 के चुनाव में पार्टी की स्थिति पर इसका असर पड़ सकता है.