फिरोजाबाद में मासूम आरव को मारने वाले विराज को मिली फांसी की सजा तो बच्चे की मां के नहीं रुके आंसू, कही ये बात

सुधीर शर्मा

• 05:21 PM • 10 Jul 2026

Firozabad Aarav Murder Case: फिरोजाबाद में डेढ़ साल के मासूम आरव की हत्या के दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को अदालत ने 40 दिन में फांसी की सजा सुनाई. फैसले के बाद आरोपी ने खुद को थप्पड़ मारा जबकि मासूम की मां भावुक होकर न्याय पर संतोष जताया.

Firozabad Aarav Murder Case

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Firozabad Aarav Murder Case: यूपी के फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद में 30 मई को डेढ़ साल के मासूम आरव की खौफनाक हत्या करने वाले दरिंदे विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को अदालत ने मौत की सजा सुनाई है. जनपद एवं सत्र न्यायालय फिरोजाबाद के जिला जज ने इस हत्याकांड के महज 40 दिन के भीतर ही आरोपी को मृत्युदंड की सजा सुनाई है. जिला जज द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद आरोपी विराज खुद को ही अदालत में थप्पड़ मारने लगा. इस फैसले के बाद यूपी Tak की टीम ने मृतक बच्चे की मां रति से बात की. इस दौरान रति ने रोते हुए अपनी पहली प्रतिक्रिया दी और पुलिस-प्रशासन का धन्यवाद करते हुए कहा कि वे कातिल को उसी तरह मरा हुआ देखना चाहती हैं जिस हाल में उनका बेटा उन्हें मिला था.

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मुझे कातिल का मरा हुआ चेहरा देखना है- रो पड़ी मां

कातिल विराज को फांसी की सजा होने के बाद मृतक आरव की मां रति ने यूपी Tak से बात करते हुए कहा 'मैं पूरे पुलिस-प्रशासन, वकील साहब और इंसाफ दिलाने में शामिल हर व्यक्ति का बहुत-बहुत धन्यवाद करती हूं कि मेरे बच्चे को इतनी जल्दी न्याय मिला. कातिल को फांसी तो बोली गई है लेकिन जिस दिन उसे फांसी हो जाएगी, मुझे उसका मरा हुआ चेहरा देखना है. बिल्कुल वैसे ही जैसे मैंने अपने तड़पते हुए बाबू का चेहरा देखा था और मैं उसे लेकर हर जगह भाग रही थी और सबने बचाए बिना कह दिया था कि यह मर चुका है.' मां ने कहा कि जैसे आज वह अपने बच्चे के लिए बिलख रही हैं, कातिल की मां भी वैसे ही बिलखे, तभी उनके कलेजे को ठंडक मिलेगी.

सोसायटी के तानों पर दिया करारा जवाब

बीते 40 दिन के दर्दनाक सफर और समाज की कड़वी बातों को याद करते हुए मां ने कहा 'लोग तो बहुत कुछ कह रहे थे. कुछ लोग तो यह भी कह रहे थे कि मां का ही कैरेक्टर खराब हो सकता है. हत्यारा दावा कर रहा था कि उसके पास कोई प्रूफ हैं तो आज कहां गए उसके सारे प्रूफ? जब इंसान का वक्त खराब होता है तो सड़क की गिट्टियां भी ठोकर मारती हैं. लेकिन हमें बुरा नहीं लगा, प्रशासन और न्यायालय ने हमें अच्छा समझा और आज न्याय हमारे सामने है.' उन्होंने यह भी बताया कि बच्चे की मौत के बाद से उसके पिता ने कोई संपर्क करने या आने की कोशिश नहीं की.

महज 6 दिन में चार्जशीट और 13 गवाहों की गवाही

शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी के अनुसार, इस संवेदनशील मामले में फिरोजाबाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मात्र 6 दिन के भीतर आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी. मुकदमे की सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष की तरफ से 13 चश्मदीद गवाहों ने कोर्ट में गवाही दी. जबकि बचाव पक्ष की तरफ से आरोपी को मानसिक बीमार साबित करने के लिए सिर्फ एक गवाही पेश की गई थी. जिला जज ने सभी सबूतों और 13 गवाहों के बयानों को पुख्ता मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया और ढाई बजे भारी सुरक्षा के बीच उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई.

सजा सुनकर खुद को थप्पड़ मारने लगा कातिल

अदालत के भीतर का मंजर भी बेहद चौंकाने वाला रहा. प्रत्यक्षदर्शियों और शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि जैसे ही जिला जज ने विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा का हुक्म सुनाया, कोर्ट रूम में मौजूद कातिल अपना आपा खो बैठा. वह पछतावे या डर के मारे खुद के ही चेहरे पर जोरदार थप्पड़ मारने लगा जिसके बाद सुरक्षा में तैनात एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों ने उसे तुरंत काबू में किया और जेल वापस ले गए.

मां ने अंत में कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों में हर किसी को इतनी ही जल्दी सजा मिलनी चाहिए ताकि अपराधियों में खौफ पैदा हो. हालांकि आरोपी के पास हाईकोर्ट में अपील करने का विकल्प मौजूद है. लेकिन मां को भरोसा है कि उनके बच्चे के हत्यारे को ऊपरी अदालत से भी कोई राहत नहीं मिलेगी.