Ghaziabad Waterlogging: दिल्ली-एनसीआर में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच गाजियाबाद से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है. विजय नगर थाना क्षेत्र के सर्वोदय नगर इलाके में एक घर के बाहर गली में तीन फीट से ज्यादा पानी जमा हो गया था, जिसमें डूबने से एक तीन साल की मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई है. घटना के समय इलाके में चारों तरफ पानी ही पानी भरा हुआ था.
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यूपी Tak की टीम ने ग्राउंड पर पहुंचकर उस गली और घर का जायजा लिया जहां यह खौफनाक हादसा हुआ था. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले कई सालों से जलभराव की यह गंभीर समस्या बनी हुई है. लेकिन नगर निगम, स्थानीय पार्षद और विधायक को बार-बार लिखित शिकायत देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई जिसका खामियाजा आज एक मासूम को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा है.
खेलते-खेलते पानी में समाई मासूम
ग्राउंड जीरो पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों ने बताया कि बुधवार देर रात करीब 3 बजे से इलाके में मूसलाधार बारिश हुई थी. देखते ही देखते पूरी गली टापू में तब्दील हो गई और सड़कों पर साढ़े तीन फीट तक पानी भर गया. सुबह के समय करीब ढाई से तीन साल की मासूम बच्ची घर के पास खेल रही थी. पानी का स्तर इतना ज्यादा था कि बच्ची का पैर अचानक गहरे पानी में फिसल गया और वह उसमें डूब गई. पानी गहरा होने के कारण काफी देर तक किसी को इस घटना की जानकारी नहीं लगी. एक पड़ोसी ने बताया, ' बच्ची का शव पानी में ऊपर तैरता हुआ दिखाई दिया, तब लोगों की नजर पड़ी. हम तुरंत उसे उठाकर डॉक्टर के पास ले गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.'
घर के अंदर भी भरा था 3.5 फीट पानी
यूपी Tak की ग्राउंड रिपोर्ट में साफ देखा जा सकता है कि पीड़ित परिवार का घर गली के रास्ते से काफी नीचे बना हुआ है. जब गली का पानी ओवरफ्लो हुआ, तो वह सीधे घर के भीतर जाकर भर गया. हादसे के वक्त घर के अंदर भी लगभग साढ़े तीन फीट तक पानी जमा था. स्थानीय महिलाओं ने रोते हुए बताया कि इस हादसे और जलभराव के कारण पूरी कॉलोनी में मातम पसरा हुआ है. बिजली-पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप है और लोगों के घरों में सुबह से खाना तक नहीं बना है, बच्चे-बुजुर्ग सभी भूखे बैठे हैं.
नेताओं और नगर निगम के दावों की खुली पोल
इस दर्दनाक हादसे के बाद निवासियों में प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश है. स्थानीय लोगों ने कैमरे पर बताया कि 'यह समस्या कोई नई नहीं है, पिछले 5-6 सालों से हम इस नरक को झेल रहे हैं. हम नगर निगम में कई बार मेल और शिकायतें भेज चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.'
एक अन्य बुजुर्ग निवासी ने विधायक को दिए गए शिकायती पत्र की रिसीविंग दिखाते हुए कहा, 'हम पार्षद से लेकर विधायक तक के चक्कर काट चुके हैं. विधायक जी के दफ्तर से लिखित रिसीविंग भी हमारे पास है. बुधवार को सर्वे कराने का वादा किया गया था, लेकिन वह बुधवार आज तक नहीं आया. अगर समय रहते नाले और ड्रेनेज की सफाई करा दी गई होती, तो आज उस मासूम की जान बच जाती.'
प्रशासनिक लापरवाही ने ली मासूम की जान
सर्वोदय नगर की यह घटना साफ तौर पर प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है, जहां मानसून की पहली कुछ बारिशों ने ही ड्रेनेज सिस्टम और विकास के दावों को पूरी तरह मलबे में तब्दील कर दिया है. फिलहाल, इस हादसे के बाद पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरी कॉलोनी प्रशासन से इस समस्या के स्थाई समाधान और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रही है.
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