किसी पिता के लिए इससे बड़ा दुख क्या हो सकता है कि जिस घर को उसने बड़े अरमानों से सजाया हो, वही घर पल भर में बिखर जाए और उसकी आंखों के सामने ही उसके मासूम बच्चे मलबे में तब्दील हो जाएं. उत्तर प्रदेश के कौशांबी में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां पल भर में छीन लीं. इस दर्दनाक हादसे का सबसे खौफनाक मंजर झेला है बैंक में काम करने वाले मंजीत ने.
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इस बारूद के धमाके में मंजीत ने अपनी छोटी बेटी और बेटे को हमेशा-हमेशा के लिए खो दिया है. जब मंजीत सुबह अपने दफ्तर के लिए निकले थे तब पूरे घर में बच्चों की चहक और खुशियों का माहौल था. लेकिन किसे पता था कि चंद घंटों बाद मिलने वाला एक फोन उनकी पूरी दुनिया उजाड़ देगा.
पटाखे फैक्ट्री से 50 मीटर की दूरी पर था मंजीत का घर
मंजीत एक बैंक में काम करते हैं. उन्होंने साल 2024 में ही बड़े चाव से पटाखा फैक्ट्री से महज 50 मीटर की दूरी पर अपना तीन मंजिला मकान बनवाया था. वे अपने तीन बच्चों और पत्नी के साथ इसी नए घर में रह रहे थे. लेकिन 31 अगस्त को अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके की गूंज ने सब कुछ खत्म कर दिया. धमाका इतना खौफनाक था कि मंजीत के मजबूत मकान की दीवारें ढह गईं, छतें गिर गईं और कमरों में दरारें पड़ गईं. लेकिन दीवारों की दरारों से कहीं ज्यादा गहरा जख्म उस पिता के सीने पर लगा है जिसके दो मासूम बच्चे छत और मलबे के नीचे दब गए.
पत्नी और एक बेटा अस्पताल में हैं एडमिट
इस दर्दनाक हादसे ने मंजीत की हंसती-खेलती दुनिया को पूरी तरह तबाह कर दिया. हादसे में उनकी छोटी बेटी और एक बेटे की मलबे में दबकर मौत हो गई. जबकि उनकी पत्नी और एक दूसरा बेटा गंभीर हालत में अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं. घटना के वक्त परिवार के कुछ अन्य सदस्य दूसरी मंजिल पर मौजूद थे इसलिए वे किसी तरह बच पाएय जो पिता सुबह हंसते हुए दफ्तर गया था जब वह भागता हुआ वापस लौटा तो घर का नजारा देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक चुकी थी.
फूट-फूटकर रोते पिता का वायरल वीडियो
सोशल मीडिया पर मंजीत के कुछ ऐसे भावुक वीडियो वायरल हो रहे हैं जिन्हें देखकर किसी भी कठोर दिल इंसान की आंखें नम हो जाएं. कभी वह घटनास्थल पर पुलिसकर्मियों के बीच बेबस होकर फूट-फूटकर रोते दिख रहे हैं, तो कभी पोस्टमार्टम हाउस के बाहर अपने मासूम बच्चों के नाम पुकार-पुकार कर बिलख रहे हैं. जब भी कोई उनसे बच्चों का जिक्र करता है मंजीत के बहते आंसू रुकने का नाम नहीं लेते. उनके चेहरे पर फैला अपनों को खोने का सन्नाटा और दर्द शब्दों से परे है.
मुझे जो दर्द मिला उससे भी कड़ा एक्शन हो आरोपी पर-मंजीत
अपनी आंखों के सामने मासूमों का जनाजा देखने वाले बदहवास पिता मंजीत बस एक ही गुहार लगा रहे हैं कि 'जिस असहनीय दर्द से मैं गुजर रहा हूं, जो कभी न भूलने वाला जख्म मुझे मिला है, इस अवैध फैक्ट्री के आरोपी के खिलाफ उससे भी ज्यादा सख्त और कड़ा एक्शन होना चाहिए.'
कौशांबी के इस हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाने वाली अवैध पटाखा फैक्ट्रियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रशासन की लापरवाही की कीमत मंजीत जैसे कई लोगों ने चुकाई है जिसका दर्द अब उम्र भर उनके साथ रहेगा.
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