बुलडोजर एक्शन से पहले ही आधी रात को हथौड़े से तोड़ ढहा दी गई मदीना मस्जिद, संभल में मुस्लिम समुदाय ने लिया चौंकाने वाला फैसला

संभल जिले के सलेमपुर सालार गांव में प्रशासन की सख्ती से पहले ही मस्जिद कमेटी ने 439 वर्ग मीटर में बनी अवैध मदीना मस्जिद को आधी रात में खुद ढहा दिया. 2018 से चल रहे कानूनी विवाद के बाद प्रशासन 4 जनवरी को बुलडोजर कार्रवाई करने वाला था.

अभिनव माथुर

• 10:15 AM • 04 Jan 2026

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उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ी खबर सामने आई है। सलेमपुर सालार उर्फ हाजीपुर गांव में 4 जनवरी 2026 को जिस अवैध मस्जिद पर प्रशासन को बुलडोजर चलाना था, वह उससे पहले ही ढहा दी गई है. प्रशासन की सख्ती और भारी कार्रवाई की आशंका के चलते मस्जिद कमेटी के लोगों ने खुद ही आधी रात के बाद मस्जिद को गिराना शुरू कर दिया. सुबह होने तक 439 वर्ग मीटर में बनी मदीना मस्जिद पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुकी थी.

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प्रशासन पहुंचने से पहले ही ढहाया गया ढांचा

बता दें कि प्रशासन की ओर से अवैध निर्माण हटाने के लिए 4 जनवरी की तारीख तय की गई थी. तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में 31 राजस्व अधिकारियों की टीम और भारी पुलिस बल सुबह करीब 10 बजे मौके पर पहुंचने वाला था. लेकिन उससे पहले ही मस्जिद कमेटी ने खुद कार्रवाई कर दी. बीती रात 12 बजे के बाद हथौड़े और औजार लेकर लोग मौके पर पहुंचे और अवैध ढांचे को गिराना शुरू कर दिया जो सुबह तक पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया था. 

2018 से चल रहा था कानूनी विवाद

यह  पूरा मामला संभल के एचौड़ा कंबोह थाना क्षेत्र से जुड़ा है. तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, मुतवल्ली हाजी शमीम पर 439 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर मस्जिद निर्माण  कराने का आरोप था. इस संबंध में 14 जून 2018 को रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी. इसके बाद तहसीलदार न्यायालय में लंबे समय तक सुनवाई चली.  सभी साक्ष्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद अदलत ने जमीन को सरकारी घोषित करते हुए कब्जा हटाने का आदेश दिया था.

बुलडोजर एक्शन की थी तैयारी

अवैध निर्माण हटाने को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट था. मौके पर कई थानों की पुलिस, पीएसी (PAC) और आरआरएफ (RRF) की कंपनियां तैनात की गई थीं. इसके अलावा लेखपाल, कानूनगो और राजस्व विभाग की टीम भी मौजूद रहने वाली थी. तीन बुलडोजर भी कार्रवाई के लिए तैयार रखे गए थे. प्रशासन की इस व्यापक तैयारी ने अतिक्रमणकारियों पर साफ दबाव बना दिया. 

प्रशासन की सख्ती से बदला रुख

तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि प्रशासन के कड़े रुख और कानूनी आदेशों के चलते मस्जिद कमेटी और स्थानीय लोगों ने खुद ही अवैध कब्जा हटाने का फैसला लिया.  उन्होंने कहा कि “अगर लोग स्वयं सरकारी जमीन से कब्जा हटा रहे हैं तो यह बेहतर स्थिति है. इससे किसी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या भी नहीं होती.”

शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हुई कार्रवाई

हालांकि मामला संवेदनशील था लेकिन पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई. किसी तरह का विरोध या हंगामा सामने नहीं आया. प्रशासन ने मलबे को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी को भी नियमों से ऊपर नहीं माना जाएगा. 

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