IAS Rinku Singh Rahi: उत्तर प्रदेश के चर्चित आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही उरई स्थित जालौन जिले की नगर पालिका में भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए पहुंचे. यह कार्रवाई बीजेपी सभासदों द्वारा ईओ पर लगाए गए गंभीर तानाशाही-और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद 29 जुलाई को की गई है. जांच के दौरान आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह की अधिशासी अधिकारी (ईओ) के साथ काफी तीखी बहस भी हुई. इसके साथ ही उन्होंने कार्रवाई करते हुए बिजली, नजूल, निर्माण और सफाई निरीक्षक कक्ष में ताला लगा होने पर प्राइवेट एजेंसियों की मदद से दस्तावेजों को स्कैन करके उन्हें जब्त करने की कार्रवाई की गई है.
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सभासदों के आरोपों से विवाद शुरू
यह पूरा मामला 10 जून को शुरू हुआ था. इस दौरान बीजेपी के 12 से ज्यादा सभासदों ने ईओ पर गंभीर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सामूहिक इस्तीफे की धमकी दी थी. इसके बाद 20 जून को सभासदों ने डीएम राजेश कुमार पांडे को एक ज्ञापन सौंपा था. उन्होंने मांग की थी कि निविदाओं, आउटसोर्सिंग और अवैध भुगतान के मामले की जांच आईएएस रिंकू सिंह राही द्वारा करवाई जाए.
चेतावनी के बाद जांच करने पहुंचे SDM
एसडीएम (न्यायिक) रिंकू सिंह राही ने जांच के लिए ईओ से जरूरी दस्तावेज मांगे थे. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पत्र जारी करके संबंधित अधिकारियों को चेतावनी भी दी थी. पत्र में साफ कहा गया था कि अगर 29 जुलाई तक रिकॉर्ड नहीं मिले, तो वह खुद आकर कागजात जब्त करेंगे. इसी चेतावनी के बाद वह तय दिन पर दोपहर दो बजे नगर पालिका कार्रवाई करने पहुंच गए.
ईओ के साथ हुई तीखी बहस
नगर पालिका पहुंचने पर आईएएस अधिकारी ने देखा कि बिजली, निर्माण और सफाई जैसे कई अहम विभागों के कमरों में ताले लगे हुए थे. वहां से कई कर्मचारी भी गायब थे. इस बात को लेकर उनकी ईओ के साथ बहुत तीखी बहस हो गई. इसके बाद रिंकू सिंह ने प्राइवेट एजेंसियों की मदद से दस्तावेजों को स्कैन और जब्त करने का काम सख्ती से शुरू करा दिया. इस दौरान वहां मौजूद लोग अपने मोबाइल से वीडियो भी बनाते रहे.
तहसील भवन में चेंबर का विवाद
इससे पहले भी आईएएस रिंकू सिंह प्रशासनिक अव्यवस्था को लेकर चर्चा में आ चुके हैं. 25 जुलाई को मुख्यमंत्री ने नई तहसील की इमारत का उद्घाटन किया था, लेकिन रिंकू सिंह को वहां बैठने के लिए कोई चेंबर (कमरा) नहीं दिया गया था. इससे परेशान होकर वह अपना सारा जरूरी सामान और फाइलें लेकर नई तहसील के बाहर भीषण गर्मी में ही खड़े रहे.
वापस पुराने दफ्तर में लौटे आईएएस
चेंबर न मिलने पर उन्होंने रात में भी तहसील के बाहर ही रुकने का फैसला किया था. जब अधिकारियों ने देखा कि मामला बढ़ रहा है, तब अपर जिलाधिकारी ने आदेश जारी किया और रिंकू सिंह राही को कलेक्ट्रेट स्थित अपने पुराने दफ्तर से ही कामकाज करने का आदेश दिया गया. इसके बाद वह अपना सामान लेकर वापस पुराने दफ्तर लौट गए. अब नगर पालिका की इस जांच और पुराने चेंबर विवाद को लेकर इस पूरे घटनाक्रम की चर्चा जनता के बीच हो रही है.
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