हेलो पुलिस मैंने पति को मार डाला... शादी के 6 महीने बाद ही अमित की हत्या करने वाली पत्नी को मिली उम्रकैद की सजा!

अनिल तिवारी

• 04:43 PM • 03 Oct 2026

सिद्धार्थनगर में पत्नी ज्योति चौधरी ने पति अमित की हत्या कर दी थी. 112 पर खुद फोन कर हत्या कबूलने वाली ज्योति को कोर्ट ने दोषी मानते हुए उम्रकैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है.

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'हेलो पुलिस.. मैंने अपने पति की हत्या कर दी है...' आधी रात के सन्नाटे में जब डायल 112 के कंट्रोल रूम में यह खौफनाक कॉल गूंजी तो ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के भी रोंगटे खड़े हो गए. यह किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म का डायलॉग नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर की वह सनसनीखेज वारदात है जिसने प्यार, शादी और भरोसे के रिश्ते को लहूलुहान कर दिया.  सिद्धार्थनगर के चिल्हिया थाना क्षेत्र के संतोरी गांव में पति की हत्या के मामले में अदालत ने उसकी पत्नी ज्योति चौधरी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. 

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रील्स से शुरू हुआ इश्क, नेपाल की फरारी और फिर शादी

सिद्धार्थनगर के चिल्हिया थाना क्षेत्र के संतोरी गांव निवासी अमित चौधरी शिवपति इंटर कॉलेज में इंटरमीडिएट का छात्र था. स्कूल आते-जाते समय सोशल मीडिया के जरिए उसकी मुलाकात बुढ़नइया गांव की रहने वाली ज्योति चौधरी से हुई. दोनों इंस्टाग्राम पर रील्स बनाते-बनाते करीब आए और दोस्ती प्यार में बदल गई. प्यार का खुमार ऐसा चढ़ा कि 12 मार्च 2024 को दोनों घर छोड़कर नेपाल भाग गए.

काफी खोजबीन और पुलिस की सक्रियता के बाद जब परिजनों से संपर्क हुआ तो दोनों परिवारों ने उनके प्यार को स्वीकार कर लिया. इसके बाद 19 मार्च 2024 को दोनों की कोर्ट मैरिज कराई गई और फिर सामाजिक रीति-रिवाजों से दोनों की शादी कर दी गई. शुरुआती दिनों में सबकुछ ठीक चल रहा था. लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि पर्दे के पीछे कोई खौफनाक साजिश आकार ले रही है.

20 सितंबर 2024 को अमित की दादी का निधन हो गया था. मुंबई में काम करने वाले पिता संतोष कुमार घर लौटे थे और पूरा परिवार तेरहवीं और ब्रह्मभोज की तैयारियों में जुटा था. 2 और 3 अक्टूबर 2024 की दरमियानी रात, दिनभर की थकान के बाद परिवार के लोग सो रहे थे. अमित और ज्योति भी ऊपर अपने कमरे में चले गए.

तभी रात करीब 1 से 2 बजे के बीच अचानक पुलिस अमित के दरवाजे पर आ धमकी. पुलिस ने दरवाजा खटखटाकर सो रहे परिवार को जगाया और बताया कि उनके ही घर के अंदर से 112 पर हत्या की सूचना दी गई है.

कमरे में पुलिस ने क्या देखा

जब बदहवास परिजन पुलिस के साथ ऊपर कमरे में पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. बिस्तर पर अमित की लाश पड़ी थी. उसके दोनों हाथ पीछे टाई से कसकर बांधे गए थे और तकिया खून से सना हुआ था. कमरे में खड़ी ज्योति के चेहरे पर न कोई शिकन थी और न कोई पछतावा. उसने पुलिस के सामने ठंडे दिमाग से कबूल किया 'मुझे गुस्सा आया और मैंने अमित को मार डाला.'

इकलौते बेटे की इस दर्दनाक मौत ने मां-बाप को तोड़कर रख दिया. पिता संतोष कुमार और मां विंध्यवासिनी आज भी इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं कि आखिर ज्योति ने उनके मासूम बेटे से ऐसी कौन सी दुश्मनी निभाई.

1 साल 6 महीने 18 दिन बाद आया इंसाफ

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित जांच पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की. जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव की अदालत में मुकदमे का ट्रायल चला. सरकारी अधिवक्ता राजेश कुमार त्रिपाठी की प्रभावी पैरवी और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने ज्योति चौधरी को हत्या का दोषी माना.

अदालत ने महज 1 साल 6 महीने और 18 दिन में सुनवाई पूरी करते हुए ज्योति चौधरी को आजीवन कारावास (उम्रकैद) और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई. कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माने की 70 प्रतिशत राशि मृतक अमित के पीड़ित परिवार को दी जाएगी. जुर्माना न भरने पर आरोपी को 5 साल की अतिरिक्त जेल काटनी होगी.
 

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