नगीना लोकसभा सीट से सांसद और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद की मुश्किलें कानूनी मोर्चे पर बढ़ गई हैं. 8 साल पुराने एक मारपीट के मामले में बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद अदालत में पेश न होने पर गाजियाबाद की विशेष MP-MLA कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करते हुए उनकी संपत्ति कुर्क करने (जब्त करने) के आदेश दिए हैं. अदालत ने सुनवाई के दौरान लगातार अनुपस्थित रहने पर उन्हें फरार मानते हुए यह कड़ी कार्रवाई की है.
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क्या है 8 साल पुराना थप्पड़ कांड?
यह पूरा मामला गाजियाबाद के साहिबाबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था. आरोप है कि लगभग 8 साल पहले एक शादी समारोह के दौरान चंद्रशेखर आजाद ने एक युवक को थप्पड़ मार दिया था. इस मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 और 305 समेत अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था. यह मामला गाजियाबाद की MP-MLA अदालत में विचाराधीन है.
बार-बार समन की अनदेखी बनी वजह
अदालत की ओर से चंद्रशेखर आजाद को सुनवाई के लिए लगातार समन जारी किए जा रहे थे. लेकिन वे एक बार भी कोर्ट में हाजिर नहीं हुए. गुरुवार को भी मामले की तय सुनवाई के दौरान जब वे अदालत में पेश नहीं हुए तो जज ने कड़ी नाराजगी जताई. कोर्ट ने माना कि आरोपी जानबूझकर अदालत की कार्यवाही से बच रहा है जिसके बाद उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करते हुए संपत्ति जब्ती का हुक्म दे दिया गया.
एक तरफ जहां चंद्रशेखर आजाद पर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ वे उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर लगातार दौरे कर रहे हैं. हाल ही में उन्होंने संभल जिले के चंदौसी स्थित मौलागढ़ मैदान में एक बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित किया जहां उन्होंने चंदौसी (31) विधानसभा सीट से अपनी पार्टी के उम्मीदवार को जिताने की अपील की.
ऐसे में कोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद अब देखना होगा कि नगीना सांसद राहत के लिए ऊपरी अदालत का रुख करते हैं या गाजियाबाद कोर्ट में हाजिर होते हैं.
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