308 पहिए, रफ्तार सिर्फ 20 KM/दिन... 2 महीने से जारी है महाबली ट्रक का सफर, 164 टन वजनी रिएक्टर लेकर पहुंचेगा लखीमपुर खीरी

उदय गुप्ता

• 11:31 AM • 29 Sep 2026

उड़ीसा के पारादीप बंदरगाह से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के लिए निकला 308 पहियों वाला विशाल ट्रक इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. इस ट्रक पर एक बड़ी मशीन यानी रिएक्टर लदा है, जिसे लखीमपुर स्थित बलरामपुर चीनी मिल कुंभी तक पहुंचाया जाना है.

Mahabali Truck

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Mahabali Truck: उड़ीसा के पारादीप बंदरगाह से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के लिए निकला 308 पहियों वाला विशाल ट्रक इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. इस ट्रक पर एक बड़ी मशीन यानी रिएक्टर लदा है, जिसे लखीमपुर स्थित बलरामपुर चीनी मिल कुंभी तक पहुंचाया जाना है. करीब 1000 किलोमीटर का सफर यह महाबली ट्रक लगभग दो महीने में पूरा कर चुका है. इसकी रफ्तार सामान्य ट्रकों जैसी नहीं है. यह रोजाना करीब 10 से 20 किलोमीटर ही आगे बढ़ पा रहा है. रास्ते में कई जगह इसकी ऊंचाई और चौड़ाई के कारण सड़क में बदलाव करना पड़ा, अवरोध हटाने पड़े और कुछ जगहों पर इसके लिए रास्ता तैयार करना पड़ा.

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1000 किलोमीटर का सफर

308 पहियों वाले इस महाबली ट्रक का सफर अपने आप में बेहद लंबा और धीमा रहा है. पारादीप से उत्तर प्रदेश तक पहुंचने में इसे करीब दो महीने लग चुके हैं. इस दौरान इसकी औसत रफ्तार करीब 16 से 18 किलोमीटर प्रतिदिन रही. जहां रास्ता बेहतर मिला, वहां यह करीब 20 किलोमीटर रोज आगे बढ़ा, जबकि मुश्किल रास्तों पर इसकी गति घटकर 10 से 12 किलोमीटर प्रतिदिन तक रह गई. ट्रक पर रखी विशाल मशीन और उसके आकार के कारण हर रास्ता इसके लिए सामान्य नहीं है. यही वजह है कि इसके आगे बढ़ने से पहले रास्ते की स्थिति को देखना पड़ता है.

 जहां पहुंचा महाबली, वहीं रास्ते में करनी पड़ी तैयारी

इस ट्रक की सबसे बड़ी खासियत इसके 308 पहिए हैं. यह सामान्य ट्रक नहीं है, बल्कि एक भारी मशीन यानी रिएक्टर को लेकर चल रहा विशेष वाहन है. इसे बेल्जियम से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर स्थित बलरामपुर चीनी मिल कुंभी तक पहुंचाया जाना है. लॉजिस्टिक्स मैनेजर अनेक भारती के मुताबिक, सफर के दौरान कई जगह ऊंचाई और चौड़ाई से जुड़े अवरोध सामने आ रहे हैं. संबंधित विभागों और अधिकारियों से अनुमति लेने के बाद इन अवरोधों को हटाया जा रहा है. चंदौली में भी ट्रक को आगे ले जाने के लिए रास्ता तैयार करना पड़ा, ताकि इसे सुरक्षित तरीके से रिंग रोड के ऊपर की तरफ निकाला जा सके. यानी इस सफर में सिर्फ महाबली ट्रक ही आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि कई जगह उसके लिए रास्ता भी तैयार किया जा रहा है.

अप्रैल में बेल्जियम से शुरू हुआ था सफर

लॉजिस्टिक्स टीम के मुताबिक, जिस विशाल मशीन को यह ट्रक लेकर चल रहा है, उसका सफर कई महीने पहले शुरू हुआ था. अप्रैल में मशीन बेल्जियम से समुद्री रास्ते के जरिए भारत के लिए रवाना हुई थी. करीब एक महीने तक समुद्र में सफर करने के बाद यह ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंची. इसके बाद मशीन को सड़क के रास्ते उत्तर प्रदेश ले जाने की प्रक्रिया शुरू हुई. पारादीप से इसे 308 पहियों वाले विशेष ट्रक पर लादा गया और झारखंड तथा बिहार के रास्ते उत्तर प्रदेश के लिए रवाना किया गया. समुद्र के रास्ते भारत पहुंचने के बाद अब यह विशाल मशीन सड़क के रास्ते अपने अंतिम गंतव्य की ओर बढ़ रही है.

चंदौली में दो दिन थमे रहे पहिए

पारादीप से निकलने के बाद महाबली ट्रक झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंचा और फिर चंदौली की ओर बढ़ा. यहां पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के पास रिंग रोड के नजदीक पहुंचने के बाद इसे रोकना पड़ा. इसकी वजह आगे का रास्ता था, जो मशीन की ऊंचाई और चौड़ाई के हिसाब से उपयुक्त नहीं था. ट्रक करीब दो दिनों तक यहां रुका रहा. इसके बाद लॉजिस्टिक्स टीम ने आगे निकलने के लिए रास्ता तैयार किया. अनेक भारती ने बताया कि सफर में कई तरह के अवरोध सामने आ रहे हैं, जिन्हें संबंधित विभागों और अथॉरिटी की अनुमति के बाद क्लियर कराया जा रहा है. उन्होंने मशीन को रिएक्टर बताया, हालांकि इसकी तकनीकी जानकारी देने के लिए खुद को अधिकृत नहीं बताया.

अभी 2 से 3 सप्ताह और चलना है

चंदौली तक पहुंचने के बाद भी 308 पहियों वाले इस ट्रक का सफर खत्म नहीं हुआ है. लॉजिस्टिक्स टीम के मुताबिक इसे अपने अंतिम गंतव्य तक पहुंचने में अभी 2 से 3 सप्ताह और लग सकते हैं. चंदौली से आगे भी रास्ता सामान्य ट्रकों की तरह आसान नहीं रहने वाला है. आगे बढ़ने से पहले ऊंचाई, चौड़ाई, पुल, ओवरब्रिज और दूसरे अवरोधों को देखा जाएगा. इसके बाद जरूरत के हिसाब से रास्ता तैयार या अवरोध हटाकर ट्रक को आगे ले जाया जाएगा. यही वजह है कि करीब 1000 किलोमीटर का यह सफर इतना लंबा हो गया है.

महाबली ट्रक देखने पहुंच रहे लोग

308 पहियों वाले इस ट्रक और उसके ऊपर रखी विशाल मशीन को देखने के लिए स्थानीय लोगों में भी काफी उत्सुकता है. आसपास के इलाकों के अलावा दूसरे स्थानों से भी लोग इसे देखने पहुंच रहे हैं. बिहार के दुर्गावती से भी लोग चंदौली आए. ट्रक देखने पहुंचीं नीलम ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर इस ट्रक को वायरल होते देखा था. इतना बड़ा ट्रक और उसके ऊपर इतनी बड़ी मशीन देखकर वह इसे अपनी आंखों से देखने पहुंचीं. बिहार के दुर्गावती से आए अब्दुल वारिस ने भी बताया कि इस ट्रक को लेकर लगातार चर्चा हो रही थी. उन्होंने सुना था कि कई जगह इसे निकालने के लिए रास्ता बनाना पड़ा और कुछ स्थानों पर अवरोध हटाए गए. ओवरब्रिज तक को उठाने की जरूरत पड़ने की बात भी उन्होंने सुनी थी. इसी उत्सुकता में वह चंदौली पहुंचे.

308 पहियों की वजह से बना आकर्षण

इस महाबली ट्रक को देखने वालों के लिए इसका आकार और 308 पहियों की संख्या सबसे बड़ा आकर्षण है. कोई इसके पहियों को देखकर हैरान है तो कोई इसके ऊपर रखी विशाल मशीन को देखकर तस्वीरें और सेल्फी ले रहा है. सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद इसे देखने की लोगों की उत्सुकता और बढ़ी है. चंदौली में रिंग रोड के पास खड़े लोग यह देखने के लिए भी उत्सुक हैं कि इतनी बड़ी मशीन को आगे किस तरह निकाला जाएगा. रास्ते में आने वाली चुनौतियों के कारण ट्रक की हर अगली चाल लोगों के लिए कौतूहल का विषय बनी हुई है.

मरीन इंजीनियर ने क्या बताया?

इस विशाल ट्रक को देखने वालों में आम लोगों के अलावा तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोग भी शामिल हैं. पास के गांव के रहने वाले मरीन इंजीनियर संजय यादव भी इसे देखने पहुंचे. उन्होंने बताया कि वह जहाजों पर इससे भी बड़े सामान देख चुके हैं, लेकिन समुद्र के रास्ते भारत आने वाली इतनी बड़ी मशीन को सड़क के रास्ते इस तरह ले जाते हुए देखना उनके लिए अलग अनुभव है. उनके मुताबिक सोशल मीडिया पर 308 पहियों वाले ट्रक की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद लोगों में इसे देखने की उत्सुकता और बढ़ गई है.

लखीमपुर तक पहुंचना अभी बाकी

पारादीप से चंदौली तक पहुंच चुका यह महाबली ट्रक अब अपने अंतिम गंतव्य लखीमपुर की ओर आगे बढ़ेगा. करीब 1000 किलोमीटर की यात्रा में यह अब तक रोजाना 10 से 20 किलोमीटर की रफ्तार से ही आगे बढ़ा है. रास्ते में ऊंचाई, चौड़ाई और दूसरे अवरोधों के कारण कई जगह बदलाव करने पड़े हैं. लॉजिस्टिक्स टीम के मुताबिक, अंतिम गंतव्य तक पहुंचने में अभी 2 से 3 सप्ताह और लग सकते हैं. ऐसे में 308 पहियों वाले इस महाबली का सफर अभी जारी है और इसके आगे बढ़ने के साथ रास्ते की नई चुनौतियां भी सामने आती रहेंगी.