गाजियाबाद में गिरधर सिंह बिष्ट को मरा समझकर हो गया अंतिम संस्कार, तेरहवीं के 39 दिन बाद जिंदा लौटा शख्स तो ये हुआ

Ghaziabad Dead Man Returns Home: गाजियाबाद में मृत घोषित कर अंतिम संस्कार किए गए युवक के 39 दिन बाद जिंदा लौटने से सनसनी फैल गई. इस घटना ने पुलिस की जांच और शव की पहचान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Ghaziabad Dead Man Returns Home

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मयंक गौड़

• 07:03 PM • 25 Jun 2026

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Ghaziabad Dead Man Returns Home: गाजियाबाद में एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसने पुलिस प्रशासन, परिजनों और आम जनता को स्तब्ध कर दिया है. जिस व्यक्ति को परिवार ने मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था जिसकी तेरहवीं की रस्में भी पूरी हो चुकी थीं और जिसकी कथित हत्या के आरोप में पुलिस ने मुकदमा तक दर्ज कर लिया था वह शख्स 39 दिन बाद अचानक सही-सलामत अपने घर लौट आया है. कौशांबी थाना क्षेत्र के वैशाली स्थित कल्पना अपार्टमेंट में रहने वाले 38 साल के गिरधर सिंह बिष्ट के इस तरह जिंदा लौटने से पूरे घटनाक्रम में एक नया और बेहद उलझा हुआ मोड़ आ गया है. इस सनसनीखेज मामले ने अब गाजियाबाद पुलिस की शिनाख्त प्रणाली और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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विवाद से शुरू हुई थी कहानी

पूरा मामला 16 मई से शुरू हुआ था जब मानसिक रूप से कमजोर युवक गिरधर सिंह बिष्ट का स्थानीय दुकानदारों से किसी बात पर विवाद हो गया था. इसके बाद कौशाम्बी पुलिस ने शांति भंग की आशंका में धारा 151 सीआरपीसी के तहत उसे गिरफ्तार कर डासना जेल भेज दिया था. 21 मई को वह जेल से रिहा तो हुआ लेकिन अपने घर नहीं पहुंचा. जब वह घर नहीं लौटा तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू कर दी.

अज्ञात शव को माना गिरधर और दर्ज हो गया हत्या का केस

इसी बीच 13 जून को मसूरी थाना क्षेत्र से पुलिस को एक अज्ञात शव बरामद हुआ. परिजनों को जब इसकी सूचना मिली, तो उन्होंने शव की पहचान गिरधर सिंह बिष्ट के रूप में कर ली. इसके बाद पोस्टमार्टम कराकर शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया. परिजनों ने पुलिस पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए कौशाम्बी थाने पर हंगामा किया था जिसके बाद गाजियाबाद के मसूरी थाने में कुछ नामजद और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा भी दर्ज कर लिया गया था.

पंजाब के सत्संग में था 'मृतक' अचानक घर लौटने से मचा हड़कंप

मामला अभी पुलिस फाइलों और जांच में तूल पकड़ ही रहा था कि गुरुवार को अचानक कथित मृतक गिरधर सिंह बिष्ट खुद चलकर अपने घर पहुंच गया. उसे साक्षात सामने खड़ा देख परिवार, पड़ोसी और पूरी सोसायटी के लोग सन्न रह गए. गिरधर ने बताया कि वह जेल से छूटने के बाद घरवालों से नाराज होकर पंजाब चला गया था और वहां एक सत्संग में रह रहा था.

जांच पर उठे गंभीर सवाल

गिरधर के जिंदा लौटने के बाद अब कानून और पुलिसिया तफ्तीश के सामने कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. जिस शव का अंतिम संस्कार गिरधर मानकर किया गया, वह आखिर किसका था? परिजनों द्वारा शव की पहचान करने के बाद क्या पुलिस ने वैज्ञानिक जांच या डीएनए (DNA) परीक्षण जैसी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया? गलत शिनाख्त के आधार पर जिन बेकसूर लोगों को हत्यारोपी बनाकर प्रताड़ित किया गया, उनके मानवाधिकारों का क्या?

बेकसूरों के परिजनों ने की निष्पक्ष जांच की मांग

इधर, गिरधर की कथित हत्या के आरोप में जिन लोगों को पुलिस ने संदेह के दायरे में लिया था, उनके परिजन भी अब सामने आ गए हैं. उनका कहना है कि गलत पहचान की वजह से उनके परिवार के लोगों को जबरन अपराधी बना दिया गया और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी. उन्होंने मांग की है कि इस पूरे लापरवाही भरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए.

अब क्या कर रही है पुलिस?

सोसायटी में गिरधर को देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ है. वहीं स्थानीय पुलिस अब गिरधर को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है ताकि उसके गायब होने के सही कारणों का पता लगाया जा सके. इसके साथ ही पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती उस अज्ञात शव की वास्तविक पहचान करने की है जो आज भी कागजों में अपनी असली पहचान का इंतजार कर रहा है. अब देखना होगा कि वरिष्ठ अधिकारी इस लापरवाही की जिम्मेदारी किस पर तय करते हैं.