'अगर पेंशन चाहिए तो बैंक उन्हें ही आना पड़ेगा...', फर्रुखाबाद में मैनेजर की बात से परेशान होकर 72 साल की दादी को ठेले पर लिटाकर बैंक पहुंचा पोता

Farrukhabad Old Women Pension News: यूपी के फर्रुखाबाद में एक पोता अपनी 72-73 साल की दादी किशन प्यारी को ठेले पर लिटाकर बैंक पहुंच गया, क्योंकि उनकी पेंशन निकालनी थी.

Farrukhabad Pension Issue News

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फिरोज खान

• 04:40 PM • 07 Jun 2026

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Farrukhabad Pension Issue News: यूपी के फर्रुखाबाद में एक पोता अपनी 72-73 साल की दादी किशन प्यारी को ठेले पर लिटाकर बैंक पहुंच गया, क्योंकि उनकी पेंशन निकालनी थी. बताया जा रहा है कि बैंक मैनेजर की ओर से कहा गया था कि अगर पेंशन चाहिए तो बैंक उन्हें ही आना पड़ेगा, इसी बात से परेशान होकर यह स्थिति बनी और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. बता दें किशन प्यारी के पति सरकारी नौकरी में बिजली विभाग में कार्यरत थे और उनके निधन के बाद उन्हें पेंशन मिलनी शुरू हुई, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ अब उनकी हालत ऐसी हो गई है कि चलना-फिरना मुश्किल है, कूल्हे में चोट और शारीरिक कमजोरी के कारण वह पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर हैं. 

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सवाल यह था कि पेंशन कैसे निकाली जाए, क्योंकि किशन प्यारी के पोते मनु पाल उन्हें बैंक लेकर जाना चाहते थे ताकि पेंशन मिल सके, लेकिन दादी खुद चलकर बैंक तक नहीं जा सकती थीं. मनु पहले बैंक भी गए और उन्होंने स्टाफ को दादी की स्थिति समझाई, लेकिन मैनेजर की ओर से कहा गया कि पेंशन के लिए व्यक्ति का स्वयं उपस्थित होना जरूरी है. इसके बाद अगले दिन मनु ने ऐसा कदम उठाया जिसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया, वे अपनी दादी को हाथ ठेले पर लिटाकर, धूप से बचाने के लिए छाता लगाकर बैंक ले गए, जहां गर्मी और सड़क के बीच यह बुजुर्ग महिला और उसका पोता पेंशन के लिए निकल पड़े. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया.

अब इस मामले को लेकर लोगों की राय दो हिस्सों में बंट गई है. एक पक्ष का कहना है कि यह सिस्टम की सख्ती नहीं बल्कि संवेदनहीनता का उदाहरण है. उनका तर्क है कि आरबीआई की गाइडलाइंस के अनुसार 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों या असहाय व्यक्तियों के लिए बैंकिंग प्रक्रिया घर पर भी पूरी की जा सकती है. वहीं दूसरी ओर कुछ लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक परिवार को ऐसी मजबूरी क्यों झेलनी पड़ी कि उसे अपनी बीमार और असहाय दादी को ठेले पर लिटाकर बैंक तक ले जाना पड़ा.

वहीं पोते मनु का कहना है कि उन्होंने यह कदम मजबूरी में उठाया, क्योंकि दादी की तबीयत ऐसी नहीं थी कि वह खुद चलकर बैंक जा सकें, लेकिन पेंशन उनके लिए जरूरी थी. अब यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है, जहां लोग इस बात पर बहस कर रहे हैं कि इसमें जिम्मेदारी किसकी है बैंक की, सिस्टम की या फिर हालात की.