मीरजापुर की चंदा शुक्ला ई-रिक्शा चला रोज का कमा रहीं इतना रुपया! दूसरों को भी ये ट्रिक सिखा बना रहीं आत्मनिर्भर

Mirzapur Woman E-Rickshaw Driver: मिर्जापुर की चंदा शुक्ला ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन कर रही हैं और 40 से अधिक महिलाओं को ई-रिक्शा चलाने की ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर बना चुकी हैं. उनकी संघर्ष और हौसले से भरी कहानी आज महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.

Mirzapur Woman E-Rickshaw Driver: कभी घर की जिम्मेदारियों का बोझ, कभी आर्थिक तंगी और कभी समाज के ताने, लेकिन हौसलों के आगे हर मुश्किल छोटी पड़ गई. मिर्जापुर की सड़कों पर दौड़ता एक ई-रिक्शा आज सिर्फ सवारी नहीं ढो रहा बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की कहानी सुना रहा है. जिस समाज में आज भी महिलाओं के लिए घर से निकलकर काम करना चुनौती माना जाता है, वहीं चंदा शुक्ला ने ई-रिक्शा चलाकर न सिर्फ अपने परिवार को संभाला, बल्कि दर्जनों महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने की राह भी दिखाई. चंदा की यह कहानी हर उस महिला के लिए मिसाल है जो हालात से लड़ने का हौसला रखती है.

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मिर्जापुर की चंदा शुक्ला बनीं महिलाओं के लिए मिसाल

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले की रहने वाली चंदा शुक्ला पिछले चार सालों से ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं. भरुहना की रहने वाली चंदा आज मिर्जापुर शहर में एक पहचान बन चुकी हैं. रोजाना 600 से 800 रुपये की कमाई कर वह अपने घर की जिम्मेदारियां निभा रही हैं. लेकिन उनकी पहचान सिर्फ एक ई-रिक्शा चालक तक सीमित नहीं है बल्कि वह अब महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली एक मजबूत कड़ी बन चुकी हैं.

गहने बिके, हालात बिगड़े पर हौसला नहीं टूटा

बता दें कि चंदा शुक्ला की जिंदगी आसान नहीं रही है. शादी के बाद परिवार में कई दुखद घटनाएं हुईं और घर की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई. हालात को संभालने के लिए चंदा ने अपने गहने बेचकर पति के लिए ई-रिक्शा खरीदवाय. कुछ समय तक पति ने रिक्शा चलाया लेकिन अचानक वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गए. पति की बीमारी के बाद घर की आर्थिक स्थिति और खराब हो गई और परिवार के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने की चुनौती खड़ी हो गई.

पहली कमाई सिर्फ 35 रुपये थी 

घर की हालत देखकर चंदा ने एक बड़ा फैसला लिया. एक रात वह चुपचाप अपने बेटे के साथ ई-रिक्शा लेकर सड़क पर निकल पड़ीं. उस रात उन्होंने पहली बार ई-रिक्शा चलाकर 35 रुपये कमाए. यह रकम भले ही छोटी थी लेकिन इससे उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ गया. इसके बाद चंदा ने दिन में भी ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया. शुरुआत में लोगों ने उनका मजाक उड़ाया, ताने मारे, लेकिन चंदा का हौसला नहीं टूटा. समय के साथ वही लोग खामोश हो गए.

40 से ज्यादा महिलाओं को बनाया मजबूत

आज चंदा शुक्ला न सिर्फ अपने परिवार का खर्च चला रही हैं, बल्कि निजी स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को ई-रिक्शा चलाने की ट्रेनिंग भी दे रही हैं. अब तक वह 40 से अधिक महिलाओं को ई-रिक्शा चलाना सिखा चुकी हैं, जिससे वे भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें. चंदा महिलाओं को घरेलू और सरल तरीके से ट्रेनिंग देती हैं ताकि वे बिना डर और झिझक के इस काम को सीख सकें. 

ई-रिक्शा सीख रही इंदु श्रीवास्तव बताती हैं कि वह चंदा दीदी से ट्रेनिंग लेने आती हैं. वहीं इंदु का कहना है कि चंदा बहुत अच्छे और घरेलू तरीके से सिखाती हैं, जिससे सीखना आसान हो जाता है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है. चंदा आज उन महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी हैं जो आर्थिक मजबूरी के कारण पीछे रह जाती हैं.

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