Amroha Three Sisters Prank: उत्तर प्रदेश के अमरोहा में सोशल मीडिया पर वायरल हुए तीन बहनों की एक ही युवक से शादी के दावे ने नया मोड़ ले लिया है. बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के हस्तक्षेप के बाद तीनों लड़कियां समिति के सामने पेश हुईं और उन्होंने बताया कि यह शादी नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए बनाया गया एक प्रैंक वीडियो था. मामले में सबसे छोटी युवती की उम्र 15 साल बताई गई थी, जिसके चलते जांच शुरू हुई थी. हालांकि, लड़कियों के बयान के बाद फिलहाल इस मामले में नई स्थिति सामने आई है.
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बाल कल्याण समिति ने मांगी थी जांच रिपोर्ट
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद बाल कल्याण समिति ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित पुलिस थाने और जिला प्रोबेशन विभाग से जांच रिपोर्ट तलब की थी. समिति ने पुलिस से तीन दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा था. इसके बाद तीनों लड़कियां सीडब्ल्यूसी कार्यालय पहुंचीं और अपने बयान दर्ज कराए. इस दौरान उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने किसी युवक से शादी नहीं की थी और पूरा मामला केवल एक प्रैंक वीडियो का हिस्सा था. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि तीनों लड़कियां सगी बहनें नहीं, बल्कि उनमें से एक मौसेरी बहन है.
अब सारी सच्चाई आई सामने
देविका उर्फ सावित्री ने समिति के सामने बताया कि वीडियो को प्रैंक के तौर पर बनाया गया था और कुछ दिन बाद इसकी सच्चाई बताने की योजना भी थी. हालांकि, मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इसके बाद हिंदू संगठनों तथा पुलिस प्रशासन की सक्रियता बढ़ गई. देविका ने कहा, 'हमने यह वीडियो केवल प्रैंक के तौर पर बनाया था. बाद में सच्चाई बताने वाले थे, लेकिन कार्रवाई के डर से ऐसा नहीं कर सके और इसे सच बताते रहे.' बाद में जब बाल कल्याण समिति ने पूरे मामले की जांच शुरू की, तब उन्होंने वास्तविकता सामने रखी.
सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष ने क्या कहा?
बाल कल्याण समिति, अमरोहा के अध्यक्ष अतुलेश भारद्वाज ने बताया कि यह मामला हसनपुर थाना क्षेत्र के धौरिया गांव से जुड़ा है. उन्होंने कहा, 'सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद हमने संबंधित थाने और जिला प्रोबेशन विभाग से जांच रिपोर्ट मांगी थी. पुलिस की रिपोर्ट मिल गई है, जबकि प्रोबेशन विभाग की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है. बच्चियों ने अपने बयान में कहा है कि उन्होंने शादी नहीं की, बल्कि फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए केवल प्रैंक वीडियो बनाया था.' समिति अब उपलब्ध रिपोर्ट और बयानों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी करेगी.
प्रैंक को लेकर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले प्रैंक वीडियो और उनके प्रभाव को लेकर भी बहस छेड़ दी है. जिस वीडियो को लोग सच मान बैठे थे, वह अब लड़कियों के अनुसार केवल लोकप्रियता पाने की कोशिश निकला. हालांकि, कैमरे के पीछे कई लोग इसे कार्रवाई से बचने का तरीका भी बता रहे हैं. वहीं, सबसे छोटी युवती के नाबालिग होने के कारण यह मामला पहले से ही संवेदनशील बना हुआ था. ऐसे में यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ में बनाए जाने वाले ऐसे वीडियो भविष्य में किस तरह की कानूनी और सामाजिक चुनौतियां पैदा कर सकते हैं.
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