Vindhyachal Dham Donation Records News: अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब मिर्जापुर स्थित विश्व प्रसिद्ध मां विंध्यवासिनी धाम में दान के रूप में मिलने वाले सोने-चांदी के आभूषणों की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं. यह मामला तब चर्चा में आया जब श्री विंध्य पंडा समाज के पूर्व अध्यक्ष राजन पाठक ने मंदिर में आने वाले आभूषणों के रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए. उनका कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोने और चांदी के आभूषणों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाता, जिससे पारदर्शिता को लेकर संदेह की स्थिति बनती है. इस मुद्दे ने मंदिर प्रशासन की व्यवस्था और दान प्रबंधन को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
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22 दान पात्रों में आता है नकद
मां विंध्यवासिनी धाम देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. नवरात्र और विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार नकद धनराशि, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती वस्तुएं दान करते हैं. मंदिर परिसर के अलावा कालीखोह और अष्टभुजा मंदिर में कुल 22 दान पात्र स्थापित किए गए हैं. डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्थानों पर क्यूआर कोड भी लगाए गए हैं. प्रशासनिक व्यवस्था के तहत इन दान पात्रों को हर तीन से चार महीने में खोला जाता है और प्राप्त दान की गणना की जाती है. यह पूरी प्रक्रिया प्रशासन की निगरानी में संपन्न होती है.
'पीली धातु' और 'सफेद धातु' लिखने का आरोप
श्री विंध्य पंडा समाज के पूर्व अध्यक्ष राजन पाठक का आरोप है कि दान पात्रों से निकलने वाले सोने और चांदी के आभूषणों का विस्तृत रिकॉर्ड नहीं बनाया जाता. उनके अनुसार रजिस्टर में केवल 'पीली धातु' और 'सफेद धातु' लिखकर प्रविष्टि कर दी जाती है. यह नहीं बताया जाता कि दान में कौन सा आभूषण मिला, उसका वजन कितना था और उसकी अनुमानित कीमत क्या थी. राजन पाठक का कहना है कि यदि कोई श्रद्धालु सोना या चांदी का आभूषण दान करता है तो उसका पूरा विवरण दर्ज किया जाना चाहिए. उनका मानना है कि इससे रिकॉर्ड अधिक मजबूत होगा और श्रद्धालुओं का भरोसा भी बढ़ेगा. उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्ष 1982 से विंध्य विकास परिषद मंदिर की व्यवस्था संभाल रही है, लेकिन अब तक आभूषणों के लिए व्यवस्थित स्टॉक रजिस्टर या सार्वजनिक इन्वेंट्री प्रणाली विकसित नहीं की गई है.
सुरक्षित रखरखाव पर प्रशासन का पक्ष
मंदिर प्रशासन के अनुसार विंध्याचल, कालीखोह और अष्टभुजा मंदिर में रखे गए 22 दान पात्रों से सालाना करीब डेढ़ करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त होती है. प्रशासन का कहना है कि सोने-चांदी के आभूषणों की मात्रा बहुत अधिक नहीं होती, लेकिन जो भी आभूषण प्राप्त होते हैं उन्हें सुरक्षित रूप से डबल लॉकर सिस्टम में रखा जाता है. हालांकि पूर्व पदाधिकारी का कहना है कि आभूषणों की संख्या कम या ज्यादा होना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उनका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना चाहिए ताकि किसी भी तरह की शंका की गुंजाइश न रहे.
सचिव बोले- शिकायत नहीं मिली
विंध्य विकास परिषद के सचिव और सिटी मजिस्ट्रेट अविनाश कुमार ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दान पात्रों की गणना पूरी तरह प्रशासनिक निगरानी में की जाती है. उन्होंने बताया कि गणना के समय मजिस्ट्रेट की मौजूदगी रहती है और लेखपाल तथा अमीन धनराशि की गिनती करते हैं. पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में संपन्न होती है. अविनाश कुमार के अनुसार उनके कार्यकाल में दान या दान पात्रों से संबंधित किसी प्रकार की शिकायत सामने नहीं आई है. उन्होंने कहा कि सोने-चांदी के जो भी आभूषण प्राप्त होते हैं, उन्हें सुरक्षा मानकों के तहत डबल लॉकर में सुरक्षित रखवाया जाता है. हालांकि रिकॉर्ड की पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों ने अब इस व्यवस्था पर नई चर्चा शुरू कर दी है.
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