Mirzapur News: एक तरफ जहां गरीबों को गेहूं के दाने के लाले पड़े हुए हैं, वहीं भारतीय खाद्य निगम एवं राज्य भंडारागार निगम के अधिकारी एवं कर्मचारी के उदासीनता से सैकड़ों बोरी गेहूं क्रय होने के बाद बारिश के पानी से भींग कर खराब हो रहा है. लापरवाही सामने आने के बाद जहां हड़कंप मचा हुआ है वहीं कोई भी जिम्मेदार मुंह खोलने को तैयार नहीं है.
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बताया जा रहा है कि गेहूं की टीडी 28 जून 2026 को कटी थी. उतार न होने के कारण और परिवहन ठेकेदार की लापरवाही के कारण गेहूं बारिश के पानी में भींगने की वजह से सड़ रहा है. गेहूं की ये दुर्दशा देख जहां लोगों में तरह-तरह की चर्चा हो रही है वहीं अब इसकी भरपाई कैसे की जाए? इसको लेकर सवाल खड़े हो रहें हैं.
बताया जा रहा है कि यह गेहूं खरीद केंद्र थरपरसिया, लालगंज की केन्द्र प्रभारी आकांक्षा शुक्ला का है, 295 कुंतल की टीडी कटी थी 75 बोरी वापस कर दी गई हैं, उस गेहूं की ये दुर्दशा देख हर कोई माथा पकड़ ले रहा है कि अन्न की यह दुर्दशा क्या उचित है और इसके लिए जवाबदेह कौन होगा. चर्चा है कि यह अव्यवस्था भारतीय खाद्य निगम एवं राज्य भंडारागार निगम के अधिकारी एवं कर्मचारी के उदासीनता से हो रहा है. मज़े कि बात है कि क्रय केंद्रों से गेहूं क्रय करने के बाद उसे सुरक्षित रखें जाने के सख्त निर्देश दिए गए थे ताकि गेहूं खुले में न हो और बारिश होने पर उसके भींगने का अंदेशा न हो लेकिन इसी लापरवाही नहीं तो और क्या कहा जाएगा कि बरसात शुरू होने से पहले इसे सुरक्षित रखने का कोई भी जतन नहीं किया गया. और तो और जिलाधिकारी एवं अन्य उच्च स्तरीय अधिकारियों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे केन्द्र प्रभारियों में आक्रोश बढ़ रहा है.
केन्द्र प्रभारियों का कहना है कि इस अव्यवस्था के लिए पूर्णतया भारतीय खाद्य निगम एवं राज्य भंडारागार निगम के अधिकारी एवं कर्मचारी जिम्मेवार हैं जिनकी उदासीनता के परिणाम स्वरूप गेहूं खराब हुए हैं.
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