Instagram पर लड़की बनकर करते थे चैट, फिर ऑफिस बुलाकर करते थे ब्लैकमेल, मेरठ में ये क्या हो रहा था?

उस्मान चौधरी

• 10:30 AM • 02 Aug 2026

मेरठ में इंस्टाग्राम के जरिए लोगों को हनीट्रैप में फंसाकर कथित तौर पर ब्लैकमेल और वसूली करने वाले गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है. पुलिस ने मामले में राहुल पाल निवासी रिठानी और आकाश निवासी पुट्ठा को गिरफ्तार किया है.

Meerut Honey Trap Gang

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Meerut Honey Trap Gang: मेरठ में इंस्टाग्राम के जरिए लोगों को हनीट्रैप में फंसाकर कथित तौर पर ब्लैकमेल और वसूली करने वाले गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है. पुलिस ने मामले में राहुल पाल निवासी रिठानी और आकाश निवासी पुट्ठा को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया पर लड़की बनकर युवकों से बातचीत शुरू करते थे और फिर उन्हें मिलने के लिए मोहकमपुर स्थित एक ऑफिस में बुलाते थे. वहां पहुंचने के बाद खुद को पुलिसकर्मी या अधिकारी बताकर फर्जी FIR और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया जाता था. पुलिस के मुताबिक इसी तरीके से नीरज पाल नाम के व्यक्ति को भी जाल में फंसाया गया और उससे दो लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई. आरोपियों ने उसके खाते से 10 हजार रुपये भी ट्रांसफर करा लिए थे.

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इंस्टाग्राम पर लड़की बनकर शुरू करते थे बातचीत

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क में पांच लोग शामिल थे. गिरोह के सदस्य इंस्टाग्राम पर लड़की की पहचान बनाकर युवकों से संपर्क करते थे. बातचीत बढ़ने के बाद सामने वाले को विश्वास में लिया जाता और फिर मिलने के लिए मोहकमपुर स्थित ऑफिस बुलाया जाता था. पुलिस के अनुसार, ऑफिस पहुंचने के बाद कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग का सिलसिला शुरू होता था. आरोप है कि गिरोह के सदस्य कभी पुलिसकर्मी तो कभी पुलिस अधिकारी बनकर सामने आते थे. इसके बाद नकली FIR दिखाकर पीड़ित को डराया जाता और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर रकम मांगी जाती थी. पुलिस का कहना है कि नीरज पाल के साथ भी इसी तरीके का इस्तेमाल किया गया.

लड़की से मिलने पहुंचा युवक

पुलिस के मुताबिक, ब्रह्मपुरी थाने में नीरज पाल ने शिकायत दर्ज कराई थी. उसने आरोप लगाया कि शशांक शर्मा, राहुल पाल, आकाश और दो अन्य लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी और पुलिस अधिकारी बताकर उसे धमकाया. शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने पुलिस कार्रवाई का डर दिखाते हुए उससे दो लाख रुपये की रंगदारी मांगी और उसके बैंक खाते से 10 हजार रुपये भी ट्रांसफर करा लिए. एसपी सिटी विनायक गोपाल भोंसले ने बताया कि नीरज को जब मिलने के लिए बुलाया गया तो वहां पहुंचने पर उसे पता चला कि जिस लड़की से वह संपर्क में था, वह वहां मौजूद ही नहीं थी. इसके बाद कथित तौर पर वीडियो के नाम पर उसे ब्लैकमेल किया गया और दो लाख रुपये की मांग की गई.

पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस की टीम गठित की गई. शिकायत के आधार पर तत्काल मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की गई. इसी दौरान पुलिस ने राहुल पाल और आकाश को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के मुताबिक, दोनों से पूछताछ में गिरोह के काम करने के तरीके के बारे में जानकारी मिली. जांच में सामने आया कि गिरोह में कुल पांच सदस्य होने की बात सामने आई है. पुलिस अब बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क ने अब तक कितने लोगों को इंस्टाग्राम के जरिए अपने जाल में फंसाया और कितने लोगों से पैसे की वसूली की गई.

फर्जी पुलिस चौकी की खबर पर पुलिस ने किया साफ

इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि आरोपी मोहकमपुर में फर्जी पुलिस चौकी चलाते थे. हालांकि मेरठ पुलिस ने इस दावे को खारिज किया है. एसपी सिटी विनायक गोपाल भोंसले ने कहा, 'सोशल मीडिया पर फर्जी पुलिस चौकी बनाए जाने की बात चल रही है, लेकिन पुलिस की जांच में ऐसी कोई चौकी की पुष्टि नहीं हुई है. वहां कोई फर्जी पुलिस चौकी नहीं थी, बल्कि एक ऑफिस था. यह हनीट्रैप गिरोह था, जिसके दो आरोपियों राहुल पाल और आकाश की गिरफ्तारी हो चुकी है.' पुलिस का कहना है कि ऑफिस का इस्तेमाल गिरोह द्वारा लोगों को डराने और कथित तौर पर वसूली करने के लिए किया जाता था.

कार से लेकर वॉकी-टॉकी तक मिला सामान

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से कई सामान बरामद किए हैं. इनमें बिना नंबर प्लेट की एक कार, एक नंबर प्लेट, दो मोबाइल फोन, टेलीफोन, लैपटॉप, टैबलेट, कैलकुलेटर और वॉकी-टॉकी शामिल हैं. इसके अलावा फोन-पे रिसीवर बॉक्स, बेंत, बीट बुक, मोहर, नेम प्लेट, अलग-अलग प्रार्थना पत्र, फाइलें और अन्य दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं. पुलिस इन सामान और दस्तावेजों की जांच कर रही है, ताकि गिरोह की गतिविधियों और उसके नेटवर्क के बारे में ज्यादा जानकारी मिल सके. पुलिस के मुताबिक, गिरोह के दो सदस्य अभी फरार हैं. उनकी तलाश जारी है और जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इंस्टाग्राम के जरिए कितने लोगों को निशाना बनाया गया और उनसे कितनी रकम वसूली गई.