मेरठ में रात होने से पहले खुला स्कूल का ताला... अंदर का नजारा देख हेडमास्टर-टीचर ने पकड़ लिया सिर; दोनों सस्पेंड

यूपी तक

• 01:04 PM • 29 Jul 2026

मेरठ के सरूरपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बहादुरपुर नंबर-1 में छुट्टी के बाद 5वीं की छात्रा क्लासरूम में बंद रह गई. मामले की जांच में गंभीर लापरवाही सामने आने पर बीएसए ने हेडमास्टर और एक सहायक शिक्षक को निलंबित कर दिया.

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मेरठ में सरूरपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बहादुरपुर नंबर-1 में स्कूल बंद होने के बाद 5वीं कक्षा की एक मासूम छात्रा क्लासरूम के भीतर ही बंद रह गई. इस गंभीर लापरवाही पर एक्शन लेते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) आशा चौधरी ने हेडमास्टर राजीव कुमार और सहायक शिक्षक उमेश कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है.

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इसके साथ ही BSA ने तीन अन्य सहायक अध्यापकों को सख्त चेतावनी देते हुए उनकी सर्विस बुक में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने के निर्देश दिए हैं. 25 जुलाई को हुई इस घटना ने पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है और सरकारी स्कूलों में बच्चों की देखभाल को लेकर फिर से बहस छेड़ दी है.

सोचिए, जिस स्कूल के भरोसे माता-पिता अपने बच्चों को सुरक्षित महसूस करते हैं, वहीं अगर ऐसी लापरवाही हो जाए तो किसी भी अभिभावक का दिल सहम जाना लाजमी है. सवाल यह है कि आखिर एक हंसती-खेलती बच्ची क्लासरूम में कैसे बंद रह गई और स्टाफ को भनक तक नहीं लगी? 

ताला लगाकर चले गए और बच्ची अंदर फंसी रही

दरअसल, 25 जुलाई को जब स्कूल की छुट्टी हुई तो सब अपने-अपने घर जाने की जल्दी में थे. इसी आपाधापी में 5वीं में पढ़ने वाली बच्ची क्लासरूम के भीतर ही छूट गई और बाहर से दरवाजा बंद करके ताला जड़ दिया गया. जब बच्ची समय पर घर नहीं पहुंची तो परिवार वाले घबरा गए.

गनीमत रही कि गांव की शिक्षा समिति के अध्यक्ष को इसकी भनक लग गई. उन्होंने बिना वक्त गंवाए क्लासरूम का ताला खुलवाया और बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाला. इस घटना के बाद बच्ची की दादी ने स्कूल स्टाफ की लापरवाही पर गहरा आक्रोश जताया, जिसके बाद मामला सीधे जिलाधिकारी के संज्ञान में पहुंचा और जांच के आदेश दिए गए.

जांच में खुलीं नियमों की धज्जियां उड़ने की परतें

डीएम के निर्देश पर जब मामले की निष्पक्ष जांच कराई गई, तो जो लापरवाही सामने आई वह बेहद डरावनी थी. जांच रिपोर्ट के मुताबिक, हेडमास्टर राजीव कुमार स्कूल का समय खत्म होने से पहले ही चले गए थे और उन्होंने सिर्फ मौखिक (जबानी) तौर पर सहायक अध्यापक को जिम्मेदारी सौंप दी थी.

सरकारी नियमों के अनुसार, क्लास खत्म होने के बाद भी शिक्षकों को कम से कम 30 मिनट तक स्कूल में मौजूद रहना अनिवार्य होता है, लेकिन किसी भी स्टाफ ने इस नियम का पालन नहीं किया.

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि छुट्टी के बाद किसी भी शिक्षक या स्टाफ ने कमरों में जाकर यह चेक तक नहीं किया कि अंदर कोई बच्चा तो नहीं है. उल्टा, बच्चों से ही क्लासरूम में ताला लगवाने का काम करवाया गया, जिसकी वजह से यह बच्ची अंदर ही बंद रह गई.

क्या महज निलंबन से सुधरेंगे हालात?

जांच रिपोर्ट में इसे बेहद गंभीर प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी चूक माना गया है. बीएसए आशा चौधरी ने निलंबित शिक्षकों के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई के आदेश दे दिए हैं और इस पूरी घटना की एक अलग विभागीय जांच भी चल रही है.