Vrindavan news: यमुना में हुए दर्दनाक हादसे के बाद नावों के संचालन पर लगी रोक अब नाविक समाज के लिए बड़ा संकट बनती जा रही है. रोजी-रोटी छिन जाने से नाविकों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है. इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को केशीघाट पर नाविक समाज की एक अहम बैठक आयोजित की गई. यहां बताते चले कि हादसे के बाद प्रशासन ने यमुना में नावों के संचालन पर रोक लगा दी है.
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नाविकों का कहना है कि इस फैसले से उनकी आजीविका पूरी तरह प्रभावित हो गई है. एक तरफ कमाई का जरिया बंद है, तो दूसरी तरफ नगर निगम रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर हजारों रुपये वसूल रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ती जा रही है.
नाविक नेता बलवीर निषाद का कहना है कि यमुना में नाव चलाना हमारा मौलिक अधिकार है. हादसे के बाद से नाव बंद हैं, जिससे हमारे सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. हादसे के लिए जिम्मेदार निजी कंपनी है, लेकिन सजा हमें दी जा रही है. अगर प्रशासन ने पुल हटाने से पहले चेतावनी बोर्ड लगाए होते, तो शायद यह हादसा नहीं होता.
पीड़ित नाविकों ने अधिकारियों से मांग की है कि नावों के बंद होने से परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो गया है. नावों के संचालन पर लगी रोक हटाई जाए और रजिस्ट्रेशन फीस में राहत दी जाए. पीड़ित नाविकों का कहना है कि अगर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे वह धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे.
इस दौरान जमुना निषाद,गुलाब निषाद, राजबीर, कलुआ,तेजवीर,कन्हैया, तेजवीर राजू, श्यामवीर, कान्हा, रमेश निषाद, बलदेव निषाद, खेमू निषाद, देवो निषाद, पुरन निषाद, हरि शंकर निषाद, कैलाशी निषाद, शंकर निषाद,राधे निषाद आदि के अलावा सैकड़ों नाविक उपस्थित रहे.
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