Mathura News: श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर की दान व्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर संत समाज के प्रमुख संत दिनेश फलाहारी महाराज ने एक बार फिर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने मंदिर के प्रबंध न्यासी अनुराग डालमिया को पत्र लिखकर पिछले 15 वर्षों में मंदिर में प्राप्त दान, आभूषण, सोना, चांदी तथा अन्य भेंटों का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है.
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फलाहारी महाराज ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले दान की गणना और दान-पात्र खोलने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं है. उनका कहना है कि दान पेटिकाओं को खोलते समय कई बार सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए जाते हैं, जिससे संदेह की स्थिति उत्पन्न होती है, उन्होंने दान-पात्रों को खोलने की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, तकनीकी रूप से निगरानी युक्त और पूर्णतः पारदर्शी बनाने की मांग की है.
पत्र में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर के कुछ व्यवस्थापकों और पदाधिकारियों ने वर्षों के दौरान अत्यधिक संपत्ति अर्जित की है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है. उनका कहना है कि भगवान को अर्पित किया गया दान और सेवा-सामग्री सीधे प्रभु की सेवा, मंदिर विकास तथा जनकल्याण के कार्यों में उपयोग होनी चाहिए.
फलाहारी महाराज ने मंदिर प्रबंधन समिति से कपिल शर्मा को हटाने की भी मांग की है. उनका आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था के कारण मंदिर की प्रतिष्ठा और प्रबंधन की छवि प्रभावित हो रही है. उन्होंने कहा कि यदि समय रहते पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई तो श्रद्धालुओं का विश्वास कमजोर हो सकता है.
उन्होंने बताया कि इसी विषय को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र भेजकर पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि जांच से वास्तविक स्थिति सामने आएगी और मंदिर की व्यवस्थाओं पर उठ रहे प्रश्नों का समाधान होगा.
फलाहारी महाराज ने सुझाव दिया कि मंदिर में प्राप्त दान राशि का एक बड़ा हिस्सा समाजसेवा के कार्यों में लगाया जाए, विशेष रूप से उन्होंने मथुरा में गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए एक आधुनिक एवं बड़ा अस्पताल स्थापित करने की मांग की, जिससे श्रद्धालुओं के दान का लाभ सीधे जनहित में पहुंच सके.
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और ऐसी स्थिति में दान व्यवस्था की पूर्ण पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमित सार्वजनिक ऑडिट समय की आवश्यकता है. मंदिर प्रशासन को चाहिए कि वह श्रद्धालुओं के समक्ष आय-व्यय का विस्तृत विवरण प्रस्तुत कर विश्वास को और मजबूत बनाए.
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