मथुरा में बंदरों की दहशत, लोग बोले- अब घरों से निकलना भी मुश्किल

Monkey Attacks In Mathura: मथुरा में बंदरों का बढ़ता आतंक अब लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गया है. हमलों और झपट्टों से दहशत का माहौल है. बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. लगातार शिकायतों के बावजूद समाधान न होने पर लोगों ने आंदोलन की चेतावनी दी है.

 Mathura monkey menace

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Newzo

• 04:09 PM • 16 Jun 2026

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Monkey Attacks In Mathura: शहर के विभिन्न मोहल्लों और घाट क्षेत्रों में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन, नगर निगम और वन विभाग की उदासीनता के कारण स्थिति दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है. बंदरों के हमलों से लोग घायल हो रहे हैं और आम नागरिकों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है.

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घीया मंडी निवासी सुरेश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि क्षेत्र में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है, छतों पर कपड़े सुखाना, घरों की खिड़कियां खोलना और बाजार में निकलना तक जोखिम भरा हो गया है. उन्होंने कहा कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है.

वहीं गऊघाट निवासी बब्बू पंडित का कहना है कि आए दिन बंदरों के हमले में लोग घायल हो रहे हैं. बच्चों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई लोग बंदरों के काटने और झपट्टा मारने की घटनाओं के बाद उपचार कराने को मजबूर हुए हैं. मंडी रामदास निवासी राज नारायण गौड़ ने बताया कि बंदरों के भय के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है, सुबह और शाम के समय स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब बंदरों के झुंड गलियों और सड़कों पर कब्जा जमा लेते हैं. बहालराय घाटी निवासी पप्पू वैधजी ने कहा कि बुजुर्ग और छोटे बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. कई परिवारों ने बच्चों को अकेले बाहर भेजना बंद कर दिया है. लोगों में लगातार भय का माहौल बना हुआ है.

शीतल घाटी निवासी बांके बिहारी शर्मा ने बताया कि बंदरों के आतंक के चलते रिश्तेदार और परिचित भी घर आने से कतराने लगे हैं. उन्होंने कहा कि बंदर अब पहले की अपेक्षा अधिक आक्रामक और चिड़चिड़े हो गए हैं तथा गली-मोहल्लों में लोगों पर अचानक हमला कर देते हैं. असकुंडा घाट निवासी मनोज मिश्र ने बताया कि बंदरो की सँख्या भी अत्यधिक बढ़ गयी है जिला प्रशासन को इसके नियंत्रण पर ठोस कार्यवाही करनी चाहिए.

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वन विभाग, जिला प्रशासन और नगर निगम एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अपनी जवाबदेही से बच रहे हैं, कई बार शिकायतें और ज्ञापन देने के बावजूद कोई प्रभावी अभियान नहीं चलाया गया. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर नहीं छोड़ा गया तो किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता.

क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि जिला प्रशासन तत्काल वन विभाग और नगर निगम के साथ संयुक्त अभियान चलाकर बंदरों के आतंक से जनता को राहत दिलाए. साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर विशेष टीमें तैनात की जाएं ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्रवासी आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे. जनमानस का कहना है कि धार्मिक नगरी मथुरा में बंदरों की समस्या वर्षों पुरानी है, लेकिन अब यह आम लोगों की सुरक्षा और जनजीवन के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है.