श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर प्रबंधन पर आरोप, संत ने उठाई पारदर्शिता की मांग

Shri Krishna Janmabhoomi controversy: मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. खून से लिखे पत्र में फलाहारी महाराज ने वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है. आरोपों से धार्मिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है.

 Mathura News

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Newzo

• 01:40 PM • 16 Jun 2026

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Shri Krishna Janmabhoomi controversy: श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है. संत समाज से जुड़े दिनेश फलाहारी महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खून से पत्र लिखकर मंदिर के वित्तीय प्रबंधन की सीबीआई जांच कराने की मांग की है. उनके इस कदम से मंदिर प्रबंधन से जुड़े हलकों में चर्चा और हलचल तेज हो गई है.

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फलाहारी महाराज ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान और चढ़ावे के उपयोग में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है. उन्होंने दावा किया कि मंदिर की गुल्लकों को खोले जाने के दौरान कई बार सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए जाते हैं, जिससे दान राशि के प्रबंधन पर सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने मांग की कि मंदिर में आने वाले प्रत्येक दान और चढ़ावे का सार्वजनिक लेखा-जोखा रखा जाए.

उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर का प्रबंधन स्वयं राज्य सरकार की निगरानी में संचालित किया जाए और इसकी व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए. फलाहारी महाराज का कहना है कि मंदिर में आने वाला करोड़ों रुपये का चढ़ावा जनकल्याण कार्यों में लगाया जाना चाहिए. उनके अनुसार इस धन से अस्पताल, विद्यालय और अन्य सामाजिक संस्थानों का निर्माण कराया जा सकता है, जिससे समाज के गरीब और जरूरतमंद वर्ग को लाभ मिले.

पत्र में फलाहारी महाराज ने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों और कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में असामान्य वृद्धि हुई है. उन्होंने दावा किया कि जो कर्मचारी पहले सामान्य जीवन जीते थे, वे अब आलीशान मकानों और महंगी गाड़ियों के मालिक बन गए हैं. उन्होंने ऐसे लोगों की संपत्तियों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है.

फलाहारी महाराज ने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर में चढ़ने वाले सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का समुचित रिकॉर्ड नहीं रखा जाता. उन्होंने कहा कि अयोध्या सहित देश के अन्य प्रमुख मंदिरों की तरह यहां भी पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए. साथ ही उन्होंने छप्पन भोग और फूल बंगला जैसी व्यवस्थाओं में कथित कमीशनखोरी के आरोप भी लगाए.

उन्होंने दावा किया कि मंदिर से जुड़े कुछ लोगों द्वारा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बड़ी मात्रा में संपत्तियां खरीदी गई हैं, जिनकी जांच आवश्यक है. फलाहारी महाराज का कहना है कि यदि सभी रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं.

फलाहारी महाराज ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई और मामले की सीबीआई जांच नहीं कराई गई, तो वह उच्च न्यायालय में नई याचिका दायर करेंगे. उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास और मंदिर की गरिमा की रक्षा करना है.

फिलहाल मंदिर प्रबंधन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, हालांकि, खून से लिखे गए इस पत्र और लगाए गए गंभीर आरोपों ने धार्मिक एवं सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है. अब सबकी निगाहें राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.h