Mathura News: मथुरा में शनिवार को जनपद मथुरा की छाता तहसील के सभागार में संपूर्ण समाधान दिवस में शेरगढ़ निवासी पीड़ित व्यक्ति ने आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अपने पिता का इलाज कार्ड द्वारा नहीं होने का गंभीर आरोप हॉस्पिटल पर लगाया. सरकार की 'आयुष्मान भारत योजना' जहाँ गरीबों के लिए वरदान मानी जाती है. वहीं जमीनी स्तर पर कुछ अस्पतालों की मनमानी इस योजना को ठेंगा दिखा रही है.
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ताज़ा मामला छाता के शेरगढ़ से सामने आया है. जहां एक पीड़ित आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मुफ्त इलाज न होने की बात कह रहा है. उसका कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने कार्ड स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया और उसके बीमार पिता के इलाज का पूरा खर्च अस्पताल ने ले लिया और उसके पिता की मौत हो गई.
पीड़ित बिजेंदर तिवारी निवासी नगला पछेया शेरगढ़ ने बताया कि वह अपने पिता को लेकर पिछले दिनों केडी अस्पताल में भर्ती के लिए गया हुआ था. उसके पास सरकार द्वारा जारी वैध आयुष्मान कार्ड था. जब उसने अस्पताल प्रशासन से कार्ड के माध्यम से कैशलेस इलाज की मांग की तो उसे यह कहकर टाल दिया गया कि यह बीमारी इस कार्ड के अंतर्गत कवर नहीं होती".
पीड़ित का आरोप है कि अस्पताल ने उसे इलाज शुरू करने के लिए नकदी जमा करने का दबाव बनाया. मजबूरी में पीड़ित को अपनी जमा-पूंजी खर्च करनी पड़ी और भारी ब्याज पर कर्ज लेकर अस्पताल का बिल चुकाना पड़ा. इलाज में मोटी रकम खर्च होने के बाद अब पीड़ित न्याय के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है. पीड़ित ने जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और जिलाधिकारी (DM) को लिखित शिकायत भी की और अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई और खर्च हुए पैसों की वापसी की मांग की है.
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