Lucknow News: लखनऊ में एक हाई-प्रोफाइल सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. उज्बेकिस्तान की रहने वाली 45 वर्षीय लोला क्यूमोवा की गिरफ्तारी के बाद अब लखनऊ के एक प्लास्टिक सर्जन डॉक्टर विवेक गुप्ता भी इस मामले में पूरी तरह से फंस चुके हैं. पुलिस ने डॉक्टर को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ कर रही है. इस मामले ने एक साल पहले हुई पुलिस की कार्रवाई और विवेचना पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि उसी समय इस डॉक्टर को मामले में क्लीन चिट दे दी गई थी.
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फर्जी तरीके से रह रही थी लोला
पुलिस ने लखनऊ के पॉश इलाके सुशांत गोल्फ सिटी से उज्बेकिस्तान (ताशकंद) की रहने वाली लोला क्यूमोवा को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि लोला पिछले एक साल से बिना किसी वैध वीजा और पासपोर्ट के छिपकर भारत में रह रही थी. खुद को भारतीय कानून से बचाने के लिए उसने जनक प्रताप सिंह नाम के एक भारतीय व्यक्ति से शादी करने का नाटक किया और खुद को उसकी पत्नी बताया था. इसी फर्जी शादी के आधार पर उसने अपने फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा लिए थे.
इन इलाकों से चलता था रैकेट
बाहर से एक आम विदेशी महिला दिखने वाली लोला असल में एक बड़े सेक्स रैकेट का साम्राज्य चला रही थी. इसके तार उत्तर प्रदेश से लेकर देश के कई बड़े राज्यों तक फैले हुए थे. लखनऊ के राजाजीपुरम से लेकर सुशांत गोल्फ सिटी तक उसके कई अलग-अलग पते सामने आए हैं, जहां से वह अपना पूरा नेटवर्क चलाती थी. पुलिस को उसके मोबाइल से कई विदेशी महिलाओं की तस्वीरें भी मिली हैं, जिन्हें ग्राहकों को भेजा जाता था.
डॉक्टर विवेक गुप्ता पर कसा शिकंजा
लोला की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने डॉ. विवेक गुप्ता को हिरासत में लिया गया है. नियम के मुताबिक, किसी भी विदेशी नागरिक की प्लास्टिक सर्जरी करने से पहले स्थानीय पुलिस और प्रशासन (FRRO) को जानकारी देना जरूरी होता है. लेकिन, डॉ. गुप्ता ने लोला और उसके साथ जुड़ी विदेशी महिलाओं की सर्जरी करते समय ऐसा नहीं किया और न ही कोई दस्तावेज जमा किए.
क्लीन चिट पर उठे बड़े सवाल
जून 2025 में दर्ज हुई एफआईआर में डॉ. विवेक गुप्ता का नाम आरोपी के तौर पर शामिल था. लेकिन उस समय विवेचना के दौरान पुलिस ने डॉक्टर का नाम चार्जशीट से हटा दिया और उन्हें क्लीन चिट दे दी. अब जब लोला दोबारा पकड़ी गई है और डॉक्टर को फिर से हिरासत में लिया गया है, तो पुलिस की पुरानी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उन्हें तब क्लीन चिट क्यों और कैसे दी गई थी?
डॉक्टर ने सभी आरोपों को नकारा
जब यूपी तक की टीम ने डॉ. विवेक गुप्ता से बात की, तो उन्होंने चेहरा बदलने और प्राइवेट पार्ट्स की सर्जरी के दावों को पूरी तरह से नकार दिया. उन्होंने कहा, "चेहरा बदलना नामुमकिन है, कोई भी प्लास्टिक सर्जन फेशियल फीचर्स नहीं बदल सकता. मैंने केवल उसके चेहरे और आइब्रो के पास मौजूद टैटू को लेजर से हटाने का काम किया था, जिसके लिए वह कई बार मेरे क्लिनिक आई थी. मैंने इसका सारा आधिकारिक रिकॉर्ड पुलिस को दे दिया है."
एक साल पहले पकड़ी गई थीं दो महिलाएं
आपको बता दें कि एक साल पहले उज्बेकिस्तान की दो महिलाएं होल्डिया और निलोफर पकड़ी गई थीं. उन्होंने भी पुलिस को बयान दिया था कि उनकी सर्जरी भी डॉ. विवेक गुप्ता ने ही की थी. उन महिलाओं ने बताया था कि डॉक्टर ने उनसे भी कोई डॉक्यूमेंट नहीं मांगा था. जांच में यह भी सामने आया है कि 2023 में लोला ने दिल्ली स्थित उज्बेकिस्तान दूतावास में वापस जाने का आवेदन दिया था. उसे 3 महीने का समय मिला था, लेकिन उसने देश नहीं छोड़ा. फिलहाल पुलिस इस पूरे सेक्स नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है.
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