Lucknow Lawyers Police Dispute: लखनऊ में वकीलों और पुलिस के बीच चल रहा विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है और अब यह टकराव बेहद गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है. करीब एक हफ्ते पहले हुए पुलिस लाठीचार्ज के बाद वकीलों में भारी आक्रोश है और उन्होंने इसका जवाब देने का ऐलान किया है. इस पूरे मामले ने अब ऐसा रूप ले लिया है जिसने सभी को चौंका दिया है. हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि दोनों पक्षों के बीच सीधा टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है.
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बार एसोसिएशन में लाठी वितरण
बार एसोसिएशन के एक कार्यक्रम के दौरान वकीलों को बड़ी संख्या में लाठियां बांटी गईं. बताया जा रहा है कि करीब 600 लाठियां वितरित की गईं और इस दौरान बाकायदा इसका ऐलान भी किया गया. यहां तक कहा गया कि जरूरत पड़ने पर वकीलों के घरों तक भी लाठियों की डिलीवरी की जाएगी. यह भी साफ तौर पर कहा गया कि ये लाठियां किसी अपराधी से निपटने के लिए नहीं, बल्कि पुलिस से मुकाबले के लिए दी जा रही हैं, जिससे विवाद और ज्यादा बढ़ गया है.
पुलिस और वकीलों के बीच तनाव बढ़ा
इस घटना के बाद पूरे मामले की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि क्या कानून के दो महत्वपूर्ण हिस्से इस तरह आमने-सामने आ जाएंगे. स्थिति अब ‘लाठी बनाम लाठी’ तक पहुंचती दिखाई दे रही है, जिससे कानून व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
क्या है विवाद की जड़?
इस पूरे विवाद की शुरुआत लगभग एक हफ्ता पहले हुई थी जब पुलिस और नगर निगम की टीम बुलडोजर के साथ वकीलों के चेंबर्स हटाने पहुंची थी. हाई कोर्ट के आदेश के बाद अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की गई थी, लेकिन इस दौरान वकीलों ने इसका विरोध किया. आरोप है कि कार्रवाई के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और वकीलों को दौड़ा-दौड़ा कर मारा गया, जिससे तनाव और बढ़ गया.
वकीलों का आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रिया
वकीलों का कहना है कि हाई कोर्ट के आदेश में केवल 72 चेंबर्स हटाने की बात थी, लेकिन प्रशासन ने करीब 240 चेंबर्स पर कार्रवाई कर दी. उनका यह भी आरोप है कि कई निर्दोष चेंबर्स भी तोड़ दिए गए. इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है, जिसमें अखिलेश यादव ने वकीलों का समर्थन करते हुए कार्रवाई को गलत बताया है और इसे अन्यायपूर्ण करार दिया है.
सरकार से कार्रवाई की मांग
वकीलों ने अपना कामकाज पूरी तरह से बंद कर दिया है और सरकार से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है. वकीलों का कहना है कि जब तक दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे.
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