Cockroach Janta Party: सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से कॉकरोच जनता पार्टी और CGI नाम लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. यह कोई आधिकारिक रूप से रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टी नहीं है, लेकिन इसके विचारों और गतिविधियों को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई है. इंस्टाग्राम पर इस नाम से जुड़े पेज को कथित तौर पर 20 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स मिलने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई कि यह सिर्फ डिजिटल आंदोलन है या इससे आगे भी कोई राजनीतिक असर बन रहा है. बताया जाता है कि इस पहल की शुरुआत अमेरिका से अभिजीत दीपके नाम के व्यक्ति द्वारा की गई थी.
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सोशल मीडिया से शुरू हुआ आंदोलन, जमीन पर दिखा असर
हाल ही में इस विचारधारा का असर जमीनी स्तर पर भी देखने को मिला जब मथुरा के वृंदावन नगर निगम कार्यालय के बाहर एक युवक “कॉकरोच” की वेशभूषा में प्रदर्शन करते नजर आया. युवक दीपक ने कॉकरोच बनकर न सिर्फ अनोखे तरीके से विरोध जताया, बल्कि वह उसी अंदाज में चलने और नाचने लगे, जिससे वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए.
यमुना प्रदूषण को लेकर अनोखा विरोध प्रदर्शन
प्रदर्शन के दौरान दीपक ने बताया कि उनका विरोध यमुना नदी में गिर रहे गंदे नालों को लेकर है. उन्होंने नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नदी में लगातार प्रदूषण फैलाया जा रहा है और संबंधित एजेंसियां जैसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस पर पर्याप्त निगरानी नहीं कर रही हैं.
कॉकरोच बनकर संदेश देना पड़ा
दीपक ने बताया कि उनके पास अब और कोई विकल्प नहीं बचा था, इसलिए उन्होंने कॉकरोच की वेशभूषा अपनाई. उन्होंने कहा कि पद पर बैठे अधिकारी जब सामाजिक कार्यकर्ताओं को “कॉकरोच” कहकर संबोधित करते हैं, तो उन्होंने उसी शब्द को प्रतीकात्मक रूप में अपनाकर विरोध जताया है.
कानूनी पहलुओं का हवाला देकर जताया विरोध
प्रदर्शन के दौरान दीपक ने कई पर्यावरणीय कानूनों का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि वाटर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पॉल्यूशन एक्ट 1974 के तहत बिना अनुमति नदियों में प्रदूषित जल छोड़ना अपराध है. साथ ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि यमुना और अन्य नदियों की रक्षा कानूनी और संवैधानिक जिम्मेदारी है.
संविधान और अधिकारों का मुद्दा भी उठाया गया
उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का जिक्र करते हुए कहा कि स्वच्छ पर्यावरण और साफ पानी जीवन के अधिकार का हिस्सा है. साथ ही अनुच्छेद 48A और 51A का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य और नागरिक दोनों की जिम्मेदारी है कि पर्यावरण की रक्षा की जाए.
नगर निगम और प्रशासन पर गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारी का आरोप है कि यमुना में लगातार सीवेज और नालों का पानी गिराया जा रहा है, जिससे प्रदूषण बढ़ रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब नियमों का उल्लंघन साफ दिखाई दे रहा है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही. उन्होंने इसे “लापरवाही” और “प्रशासनिक उदासीनता” बताया.
सोशल मीडिया पर बढ़ती बहस और विवाद
यह पूरा मामला अब सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन चुका है. कुछ लोग इसे पर्यावरण संरक्षण की आवाज बता रहे हैं, तो कुछ इसे अनोखा और विवादित विरोध प्रदर्शन मान रहे हैं. “कॉकरोच जनता पार्टी” और इससे जुड़े बयानों को लेकर बहस और तेज होती जा रही है, जिससे यह मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है.
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