लखनऊ मध्य विधानसभा 2027: क्या रविदास मेहरोत्रा बचा पाएंगे अपना गढ़?

Lucknow Central Assembly 2027: लखनऊ मध्य की सीट पर 2027 में किसका होगा कब्जा? क्या रविदास मेहरोत्रा की जमीनी पकड़ के आगे टिक पाएगी बीजेपी? जानिए इस वीआईपी सीट के समीकरण और नीरज सिंह की दावेदारी.

यूपी तक

• 09:23 AM • 26 Mar 2026

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यूपी Tak के विशेष शो यूपी किसका में आज लखनऊ की सबसे हॉट सीटों में से एक, लखनऊ मध्य के राजनीतिक समीकरणों और 2027 के विधानसभा चुनाव की संभावनाओं का विश्लेषण किया गया है. वर्तमान सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा को एक "जमीनी नेता" माना जाता है, जिनकी पकड़ घर-घर और गली-गली तक है. उन्होंने 2022 के चुनाव में इस सीट पर जीत दर्ज की थी. दिलचस्प बात यह है कि इसी सीट से 2017 में वर्तमान डिप्टी सीएम बृजेश पाठक जीते थे, लेकिन मेहरोत्रा की मजबूती को देखते हुए उन्होंने 2022 में अपनी सीट बदलकर लखनऊ कैंट कर ली थी. 

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मेहरोत्रा का कहना है कि वे जनता की समस्याओं के लिए सड़क से विधानसभा तक संघर्ष करते हैं और 2027 में सपा की सरकार बनना तय है. 

लखनऊ मध्य का जातीय समीकरण (अनुमानित)

यह सीट मिश्रित आबादी वाली है, जहाँ व्यापारी वर्ग और मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं:

  • मुस्लिम: 90,000
  • वैश्य: 80,000
  • ब्राह्मण: 45,000 
  • कायस्थ: 45,000
  • खटीक/धानुक समुदाय: 35,000

भाजपा इस सीट को अपना "गढ़" मानती है और खोई हुई सीटों (मध्य और पश्चिम) को वापस पाने के लिए तैयारी कर रही है. चर्चा है कि भाजपा 2027 में चेहरा बदल सकती है. स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, राजनाथ सिंह के छोटे बेटे नीरज सिंह भी क्षेत्र में काफी सक्रिय हैं और उनके नाम पर विचार किया जा सकता है. भाजपा के लिए दो बार की सत्ता के कारण "एंटी-इनकंबेंसी" (सत्ता विरोधी लहर) और रविदास मेहरोत्रा की व्यक्तिगत लोकप्रियता बड़ी बाधा बन सकती है.