लखनऊ अग्निकांड मामले में सस्पेंडेड फायर अधिकारी पहुंचे थे CM योगी के पास, लेकिन अब तो पूरा केस ही पलट गया!

लखनऊ अग्निकांड में निलंबित फायर अधिकारी कमलेंद्र कुमार सिंह के यू-टर्न ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं. पहले बड़े अधिकारियों पर आरोप लगाने वाले अधिकारी ने अब माफी मांगते हुए बयान से किनारा कर लिया है. जांच और कार्रवाई जारी है.

Lucknow Fire Incident Update

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यूपी तक

• 05:54 PM • 24 Jun 2026

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Lucknow Fire Incident Update: लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड मामले में सस्पेंड हुए एक अधिकारी के यू-टर्न ने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है. कल तक अपने निलंबन को गलत ठहराने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखने वाले और बड़े अधिकारियों को बचाने का आरोप लगाने वाले इंदिरा नगर के फायर स्टेशन सेकंड ऑफिसर  कमलेंद्र कुमार सिंह अपने ही बयानों से पूरी तरह पलट गए हैं. उन्होंने एक नया वीडियो जारी कर अपने पहले के वीडियो पर माफी मांग ली है और कहा है कि उन्हें किसी ने भ्रमित करके वह बयान दिलवाया था. 15 लोगों की मौत के इस संवेदनशील मामले में एक तरफ 6 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और 4 आरोपी जेल जा चुके हैं. वहीं दूसरी तरफ सस्पेंडेड अधिकारी का कुछ ही घंटों में सुर बदल जाना अब कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है.

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बड़े अधिकारियों पर है पूरा भरोसा-कमलेंद्र सिंह

अलीगंज हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को सस्पेंड किया गया था. सस्पेंशन के तुरंत बाद एफएसएसओ कमलेंद्र कुमार सिंह का एक वीडियो और पत्र वायरल हुआ था जिसमें उन्होंने पूरी घटना के लिए मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) लखनऊ को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया था.

लेकिन अब जारी हुए अपने नए वीडियो में कमलेंद्र सिंह ने कहा 'पहले जो वीडियो वायरल हो रहा है, वह किसी अन्य व्यक्ति द्वारा मुझे भ्रमित करके बनवाया गया था. मैं उस वीडियो का पूरी तरह खंडन करता हूं. 15 लोगों की मौत से मैं आहत और मानसिक रूप से परेशान था जिसका किसी ने फायदा उठाया. मुझे अपने उच्च अधिकारियों पर पूरा भरोसा है कि जो भी जांच होगी, निष्पक्ष होगी. मैं उस वायरल वीडियो के लिए क्षमा चाहता हूं.'

पहले वीडियो में क्या लगाए थे गंभीर आरोप?

अपने पहले के बयान में कमलेंद्र कुमार सिंह ने सीधे तौर पर लखनऊ के मुख्य अग्निशमन अधिकारी यानी सीएफओ की जवाबदेही तय करने की मांग की थी. उन्होंने कहा था कि यह इमारत आवासीय उपयोग के लिए पास थी. लेकिन वर्षों से इसका अवैध रूप से व्यावसायिक उपयोग हो रहा था. आग लगने के बाद दमकल प्रक्रिया में देरी और समन्वय की कमी सीएफओ की सीधी लापरवाही को दर्शाती है. उन्होंने मांग की थी कि छोटे अधिकारियों को बलि का बकरा बनाने के बजाय सीएफओ के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए. लेकिन कुछ ही घंटों में इस बयान से पूरी तरह पीछे हटने पर अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अधिकारी पर कोई बड़ा अंदरूनी दबाव है?

आपको बता दें कि लखनऊ अग्निकांड के मामले में अब तक लगभग 6 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं. वहीं चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इसमें बिल्डिंग के मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, पेट शॉप संचालक रामकृष्ण उपाध्याय, एनिमेशन सेंटर संचालक तशा कृष्ण जयसवाल और आईटी कंपनी ऑपरेटर सुरेश कुमार साहू को गिरफ्तार किया गया है. 

अब तक क्या-क्या हुआ?

लखनऊ अग्निकांड के बाद लगातार एक्शन जारी है. लखनऊ अग्निकांड में 15 लोगों की जान चली गई. दावा किया जा रहा है कि बाहर निकलने का रास्ता नहीं था. बिल्डिंग में नियमों को ताक पर रखकर बिल्डिंग को चलाया जा रहा था. सवाल यह कि रिहायशी इलाके में कमर्शियल बिल्डिंग कैसे चलाई जा रही थी? दावा यह भी किया जा रहा है कि आग लगने के दौरान दरवाजे बायोमेट्रिक होने के चलते जाम हो गए, बंद हो गए जिससे लोग बाहर नहीं निकल पाए. वहीं बिल्डिंग की एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि बिल्डिंग में बाहर निकलने का और अंदर जाने का मात्र एक ही रास्ता था और वह जाम होने के बाद लोगों की जान पर भारी पड़ गई. अब इस मामले में एक तरफ पीड़ित परिवार लगातार इंसाफ की मांग कर रहा है. दो सदस्य एसआईटी का गठन किया गया है जो लगातार जांच पड़ताल कर रही है. एसआईटी लगभग 7 दिनों में जांच रिपोर्ट सौंपेगी. ऐसे में अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कुछ एक्शन लिया जाता है और जांच में क्या कुछ सामने आता है. लेकिन अधिकारी कमलेंद्र कुमार सिंह का यह यूटर्न लगातार सुर्खियों में है.