KGMU Lucknow Non Veg Ban: लखनऊ के दो सबसे बड़े मेडिकल संस्थानों से इस वक्त की बेहद चौंकाने वाली खबरें सामने आ रही हैं. पहली खबर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से है जहां राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अचानक हुए सरप्राइज इंस्पेक्शन के बाद हड़कंप मच गया है. केजीएमयू प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से सभी हॉस्टल मेस और कैंटीनों में नॉन-वेज पकाने और परोसने पर नो एंट्री का बोर्ड लगा दिया है. वहीं दूसरी खबर डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान से है जहां इलाज के नाम पर लापरवाही की ऐसी खौफनाक पराकाष्ठा देखने को मिली है जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए. यहां एक 29 साल के युवक को डॉक्टरों और स्टाफ की अनदेखी की वजह से अपना हाथ गंवाना पड़ा. आइए तफसील से समझते हैं इन दोनों मामलों के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी.
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KGMU में अचानक लगा नॉन-वेज पर ब्रेक
केजीएमयू के हॉस्टल्स में रहने वाले छात्रों के मेन्यू से अब नॉन-वेज गायब होने जा रहा है. दरअसल उत्तर प्रदेश की यूनिवर्सिटीज की चांसलर और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने हाल ही में केजीएमयू का औचक निरीक्षण किया था. इस निरीक्षण के दौरान जब राज्यपाल मेस में पहुंचीं तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गईं.
नॉन-वेज पकाने वाली जगहों पर साफ-सफाई की भारी कमी थी. हद तो तब हो गई जब दो मेस में एक्सपायर्ड मसाले पाए गए. 500 से अधिक छात्रों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का यह मामला सामने आते ही स्टूडेंट वेलफेयर के डीन और चीफ प्रॉक्टर की सहमति से एक कड़ा और बड़ा आदेश जारी कर दिया गया. अब हॉस्टल के अंदर न तो नॉन-वेज पकेगा और न ही परोसा जाएगा. हालांकि जो छात्र नॉन-वेज खाने के शौकीन हैं वे इसे केवल बाहर से ऑर्डर करके मंगा सकेंगे.
इस पूरे मामले पर खुद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दीक्षांत समारोह के मंच से अपनी बात रखी. उन्होंने बताया कि तीन हॉस्टलों में नॉन-वेज खाना बनते पाया गया था, जहां हाइजीन का स्तर बेहद खराब था. राज्यपाल ने साफ किया कि उन्होंने अपनी तरफ से नॉन-वेज पर रोक लगाने का कोई सीधा लिखित आदेश नहीं दिया था. लेकिन छात्रों की सेहत के साथ इतनी गंभीर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती. उन्होंने प्रशासन को भोजन की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर पनीर जैसी पौष्टिक चीजें देने के कड़े निर्देश दिए हैं जिसके बाद प्रशासन ने खुद ही यह कड़ा फैसला लिया.
फूड पाइप का ऑपरेशन कराने आए युवक का काटना पड़ा हाथ
एक तरफ केजीएमयू में मेस पर एक्शन हुआ. वहीं दूसरी तरफ लखनऊ के ही दूसरे नामी डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान से मेडिकल नेग्लिजेंस का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया. फिरोजाबाद के रहने वाले 29 वर्षीय अंकित राठौर को बीती 2 जून को संस्थान में भर्ती कराया गया था. 8 जून को डॉक्टरों ने उनकी फूड पाइप (भोजन नली) की सर्जरी की. ऑपरेशन तो कामयाब रहा. लेकिन उसके बाद जो हुआ वह किसी खौफनाक सपने जैसा था.
ऑपरेशन के तुरंत बाद अंकित ने शिकायत की कि उसका बायां हाथ पूरी तरह सुन्न हो चुका है और उसमें कोई हलचल नहीं हो रही. आरोप है कि वहां मौजूद नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों ने इस शिकायत को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया और इसे सामान्य बात बताया.
अब बैठाई गई जांच
लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि 19 जून तक अंकित का हाथ गैंग्रीन (सड़न और गंभीर इंफेक्शन) का शिकार हो गया. जब पानी सिर से ऊपर चला गया तो लोहिया संस्थान ने उचित विभाग न होने का हवाला देकर मरीज को दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया. मरीज को कहीं और दाखिला नहीं मिला तो वह बदहवास हालत में 24 जून को दोबारा लोहिया संस्थान लौटा.
लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. इंफेक्शन अंकित के पूरे शरीर में फैलने का खतरा था जिसके चलते डॉक्टरों को उसकी जान बचाने के लिए उसका बायां हाथ कोहनी के ऊपर से काटना पड़ा. इस संवेदनहीनता से नाराज पीड़ित ने अब सूबे के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर न्याय और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है. वहीं मामले के तूल पकड़ने के बाद संस्थान के प्रवक्ता डॉ. भुवन चंद्र तिवारी ने कहा है कि लिखित शिकायत मिलते ही इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.
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