Prabal Pratap Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट के भीतर जजों को 'ज्यूडिशियल सर्वेंट' कहना, कागज हवा में उड़ाना और देश के मुख्य न्यायाधीश को जाते-जाते अपशब्द कहना... यह सब करने वाले शख्स प्रबल प्रताप यादव की तस्वीरें इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हैं. पहली नजर में यह मामला व्यवस्था के खिलाफ किसी लड़ाई जैसा दिखता है. लेकिन इसकी सच्चाई कुछ और ही सामने आई है.
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उत्तर प्रदेश के इटावा का रहने वाला प्रबल प्रताप लखनऊ के विकास नगर स्थित एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी में बतौर टेक प्रोफेशनल काम करता था. वहां काम करने के दौरान उसने अपनी एक मुस्लिम सहकर्मी को निशाना बनाया. वह उस लड़की को लगातार परेशान करने लगा और उसे बेहद आपत्तिजनक, डराने वाले और गाली-गलौज से भरे ई-मेल्स भेजने लगा. जब लड़की के लिए दफ्तर में काम करना दूभर हो गया तो उसने हिम्मत जुटाकर इसकी लिखित शिकायत कंपनी प्रबंधन से की.
शिकायत मिलने पर कंपनी ने पहले प्रबल प्रताप को सुधरने की कड़ी चेतावनी दी. इसके बावजूद जब वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो कंपनी ने कड़ा रुख अपनाते हुए उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया. नौकरी जाने के बाद प्रबल प्रताप ने एक नया दांव खेला. उसने कंपनी पर 'देश विरोधी गतिविधियों' और 'साइबर क्राइम' में शामिल होने के झूठे और मनगढ़ंत आरोप मढ़ दिए.
नवंबर 2025 में उसने कंपनी पर देशविरोधी होने का आरोप लगाकर एफआईआर की अर्जी दी. कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट के आधार पर इसे सिर्फ एक कंप्लेंट केस माना. 6 अप्रैल 2026 को जब लखनऊ की अदालत ने उसकी मर्जी के मुताबिक सीधे एफआईआर का आदेश नहीं दिया तो उसने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच का रुख किया. लेकिन हाईकोर्ट ने भी उसकी याचिका खारिज कर दी और कहा कि निचली अदालत में ही तथ्य रखे जाएं.
जब सनक पहुंची सुप्रीम कोर्ट
हाईकोर्ट से खारिज होने के बाद आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली. शुक्रवार को जब जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक के सामने सुनवाई शुरू हुई तो वह वकील के भेष में अदालत की मर्यादा भूल गया. अपनी टूटी-फूटी अंग्रेजी में उसने जजों को 'ज्यूडिशियल सर्वेंट' कहा. इतना ही नहीं, उसने जजों को ही आदेश देते हुए चिल्लाकर कहा 'मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट, मैं तुम्हें ऑर्डर देता हूं कि तुम लखनऊ के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दो.'
इसके बाद उसने अपने हाथ के दस्तावेज हवा में उड़ा दिए और जब सुरक्षाकर्मी उसे पकड़कर बाहर ले जाने लगे तो उसने बचे हुए कागज फेंकते हुए कहा कि 'इसे सीजीआई को दे देना' और देश के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और अभद्र शब्दों का प्रयोग किया.
इस हंगामे के बाद भी दोनों जजों (जस्टिस विश्वनाथन और जस्टिस आलोक) ने गजब के संयम का परिचय दिया. कोर्ट ने बकायदा आदेश दिया कि इस अभद्र व्यवहार के बावजूद आरोपी के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज न किया जाए. हालांकि सुरक्षा के लिहाज से उसे तुरंत पुलिस हिरासत में ले लिया गया.
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