KGMU के बाहर फर्जी डॉक्टर बनकर हिंदू छात्राओं को बुलाता था हसन अहमद, जांच हुई तो पता चला उसका ये पुराना रिकॉर्ड

Lucknow News: लखनऊ के KGMU के बाहर फर्जी मेडिकल कैंप चलाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक युवक खुद को डॉक्टर बताकर छात्राओं को झांसे में ले रहा था. डीन की सतर्कता से खुलासा हुआ तो पूरे नेटवर्क की जांच शुरू हो गई और आरोपी पुलिस के कब्जे में है.

Lucknow News: (सांकेतिक तस्वीर)

अंकित मिश्रा

21 Apr 2026 (अपडेटेड: 21 Apr 2026, 08:23 PM)

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KGMU Fake Medical Camp: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के बाहर का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां हसन अहमद नामक एक युवक का फर्जी मेडिकल कैंप लगाने की बात पता चली है. आरोप है कि हसन खुद को डॉक्टर बताकर हिंदू छात्राओं को बहला-फुसलाकर इस कैंप में बुलाता था. केजीएमयू के डीन के.के. सिंह को मामले का पता चला तो उन्होंने  विश्वविद्यालय प्रशासन को सूचित किया. इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया है.

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खुद को डॉक्टर बताने वाला आरोपी निकला 12वीं पास

हैरानी की बात ये है कि खुद को बड़ा डॉक्टर बताने वाला हसन अहमद सिर्फ 12वीं क्लास तक पढ़ा है. बताया जा रहा है कि आरोपी सोशल मीडिया के जरिए मेडिकल की छात्राओं से संपर्क करता था. इसके बाद उन्हें समाज सेवा का झांसा देकर अपने नेटवर्क में शामिल करता था. जांच में पता चला कि वह लंबे समय से छात्राओं को अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहा था. पुलिस अब उसके पिछले रिकॉर्ड और असली इरादों को खंगाल रही है.

डीन ने खुद मेडिकल कैंप पहुंचकर पकड़ा फर्जीवाड़ा

केजीएमयू के डीन डॉ. के.के. सिंह ने बताया कि पैथोलॉजी विभाग में रमीज मलिक का मामला सामने आने के बाद एक जांच टीम बनाई गई थी. उन्हें इस जांच टीम का हेड बनाया गया था. उन्हें इसी दौरान उन्हें हसन अहमद की संदिग्ध गतिविधियों के बारे में पता चला. 20 अप्रैल को जब डीन खुद मौके पर पहुंचे तो वहां करीब 20 छात्राएं मौजूद थीं. उन्होंने यहां मौके पर जांच की तो पता चला कि पूरे कैंप में एक भी प्रमाणित डॉक्टर नहीं था. इसके बाद सोमवार को आरोपी हसन अहमद को पकड़कर पूछताछ की गई.

दिल्ली एम्स में कॉन्फ्रेंस के नाम पर छात्राओं को झांसा

पूछताछ में सामने आया कि आरोपी हिंदू छात्राओं और पैरामेडिकल स्टाफ को ईमेल और डाक के जरिए दिल्ली एम्स में होने वाली एक कॉन्फ्रेंस में शामिल होने का इनविटेशन देता था. इसके लिए उसने केजीएमयू के नाम का एक फर्जी लेटर भी तैयार कर रखा था. इसमें लिखा हुआ था कि कुछ ही चुनिंदा छात्रों को एम्स ले जाया जाएगा. मौके पर एक छात्रा ने बताया कि वो आरोपी के काम को समाज सेवा समझकर उससे प्रभावित हो गई थी और कैंप में आती थी.

3 साल पहले भी पकड़ा गया था हसन

जांच में खुलासा हुआ कि हसन अहमद 3 साल पहले भी मरीजों से पैसे वसूलने के आरोप में पकड़ा जा चुका है. पूछताछ में आरोपी ने खुद माना कि उसने एम्स में किसी कॉन्फ्रेंस की अनुमति नहीं ली थी. इस दौरान उसने बताया कि  उसके साथ 8 लोगों का नेटवर्क काम करता है.

लव जिहाद के एंगल से भी होगीस जांच

वहीं छात्राओं के शारीरिक शोषण की आशंका पर आजतक ने सवाल किया गया तो प्रशासन ने कहा कि अभी तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन जांच जारी है. डीन के.के. सिंह ने कहा कि संस्थान की प्राथमिक चिंता यह है कि किसी छात्रा या डॉक्टर के साथ कोई अन्याय न हो. उन्होंने इस मामले में लव जिहाद के एंगल से भी जांच की बात कही है.

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