कानपुर के परेड क्षेत्र में नगर निगम की बुलडोजर कार्रवाई ने अब बड़ा सियासी रूप ले लिया है. सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने के नाम पर ज्योति दीक्षित नामक एक गरीब महिला और अन्य वेंडर्स के ठेलों को तोड़े जाने के बाद समाजवादी पार्टी के विधायक अमिताभ वाजपेयी गुस्से में लाल हो गए. विधायक ने अपने समर्थकों के साथ नगर निगम दफ्तर पहुंचकर अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई और नगर आयुक्त को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि कोई भी अधिकारी संविधान और फेरी नीति से ऊपर नहीं है.
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पीड़ित महिला ज्योति दीक्षित ने रोते हुए आरोप लगाया कि नगर निगम के दस्ते ने न केवल उनका इकलौता सहारा यानी ठेला पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया, बल्कि उन्हें सड़क पर घंटों जलील भी किया गया. विधायक अमिताभ वाजपेयी ने इस कार्रवाई को 'गुंडागर्दी' करार देते हुए कहा कि टाउन वेंडिंग कमेटी और सरकार की फेरी नीति का उल्लंघन किया जा रहा है. उन्होंने साफ लहजे में कहा कि अधिकारी अपनी ताकत का प्रदर्शन गरीबों पर करना बंद करें, क्योंकि कानून और संविधान का पालन करना सबके लिए अनिवार्य है.
इस पूरे घटनाक्रम को कानपुर की 'ब्राह्मण पॉलिटिक्स' से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि विपक्ष लगातार यह नैरेटिव बना रहा है कि वर्तमान सरकार में ब्राह्मणों का उत्पीड़न हो रहा है. दूसरी ओर, नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय का कहना है कि सड़क पर अवैध कब्जे और ट्रैफिक जाम की शिकायतों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है और यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए ऐसे अभियान जारी रहेंगे. फिलहाल, सपा विधायक के कड़े तेवरों और ज्योति दीक्षित के आंसुओं ने कानपुर के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है.
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