Harish Rana Last Rite: हरीश राणा की जिंदगी में हुए दर्दनाक हादसे के बाद उनके पिता ने बेटे के लिए 13 साल तक सेवा की. बेटे की हालत में कोई सुधार न आने पर पिता ने अंततः सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की अनुमति ली. 24 मार्च 2026 को हरीश ने अंतिम सांस ली. इस दौरान पिता का साहस और आस्था उनके परिवार के लिए एक प्रेरणा बनी. अंतिम संस्कार के दौरान परिवार व मित्रों के बीच गहरा दुख और कष्ट देखा गया.
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हरीश राणा चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्र थे और उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में पढ़ाई की.उनका जीवन हादसे के बाद पूरी तरह बदल गया. पिता अशोक राणा ने बेटे को बचाने की हर संभव कोशिश की लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ. परिवार ने अपने दर्द को सहते हुए भौतिक और मानसिक बल दिखाया.ब्रह्मकुमारियों के समर्थन ने पिता को जीवन की कठिनाईयों से लड़ने में मदद दी.
आशा और विश्वास की ताकत की बदौलत हरीश राणा के पिता ने टूटे दिल के साथ भी धैर्य बनाए रखा. अंतिम संस्कार में उनके संघर्ष की कहानी ने सभी को भावुक कर दिया. संतापपूर्ण क्षणों के बावजूद परिवार ने साहस दिखाया और हरीश की यादों को संजोकर रखा. उनकी मृत्यु ने एक गहरा छाप छोड़ी. लेकिन यह जीवन के चक्र को भी दर्शाता है.
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