डायपर बदलने से लेकर फिजियोथेरेपी तक...13 साल से कोमा में पड़े हरीश राणा के लिए भाई आशीष ने जो-जो किया वो रूला देगा

यूपी तक

• 10:34 AM • 25 Mar 2026

Harish Rana Emotional Story: हरीश राणा पिछले 13 साल कोमा में थे. सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु की अनुमति के बाद उनका निधन हुआ. उनका भाई आशीष ने सेवा में खुद को समर्पित किया.यह कहानी त्याग और प्यार की मिसाल है.

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गाजियाबाद की एक सोसाइटी जहां कभी जीवन की हलचल थी.आज वहां गहरी खामोशी छाई है. हरीश राणा पिछले 13 सालों से कोमा में थे और उनकी हालत ने पूरे समाज को प्रभावित किया. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से मिली इच्छा मृत्यु की अनुमति के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली. इस फैसले की पीड़ा गहराई तक महसूस की जा सकती है. क्योंकि यह केवल एक परिवार का दुख नहीं बल्कि पूरे समाज का साझा दर्द है.

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हरीश के छोटे भाई आशीष का समर्पण अत्यंत प्रेरणादायक है. उसने सालों तक अपने सपनों को पीछे छोड़कर अपने भाई की देखभाल की. दिन-रात उसके लिए समर्पित रहा, चाहे वह डायपर बदलना हो या फिजियोथेरेपी कराना.आशीष की सेवा तपस्या की तरह थी जिसने दिखाया कि सच्चा प्यार और त्याग क्या होता है.

यह कहानी केवल मौत की नहीं है बल्कि रिश्तों की गहराई और त्याग की अभिव्यक्ति है. हर दिन आशीष ने अपने भाई के लिए उम्मीद बंधाई और कभी हार नहीं मानी.भले ही हरीश अब नहीं हैं, उनकी यादें, संघर्ष और आशीष का प्यार हमेशा जीवित रहेगा. यह समाज को एकजुट करता है और इंसानियत की मिसाल पेश करता है.

हरीश की मृत्यु ने परिवार और समाज दोनों के लिए एक जटिल भावनात्मक दौर शुरू किया है.हालांकि उनकी तकलीफ खत्म हुई, उनकी कमी सदैव महसूस की जाएगी. आशीष की सेवा और संघर्ष ने यह साबित किया कि परिवार के लिए त्याग और प्रेम की कोई सीमा नहीं होती।.