हरीश राणा को अंतिम विदाई देने वाली ब्रह्माकुमारी रूपा दीदी ने उनके परिवार को लेकर ये सब बताया

Brahmakumari Roopa Didi Interview: ब्रह्माकुमारी रूपा दीदी ने साझा किए हरीश के अंतिम पलों के भावुक अनुभव. 13 साल की कैद से आजाद हुआ आत्मा रूपी पंछी. जानें कैसे तिलक लगाकर दी गई अंतिम विदाई.

गौरव कुमार पांडेय

25 Mar 2026 (अपडेटेड: 25 Mar 2026, 01:42 PM)

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Brahmakumari Roopa Didi Interview: 13 सालों तक अस्पताल के बिस्तर पर जीवन और मृत्यु के बीच झूलने वाले हरीश राणा का संघर्ष आखिरकार समाप्त हो गया. उनके अंतिम संस्कार के दौरान ब्रह्माकुमारी रूपा दीदी ने बताया कि कैसे उन्होंने हरीश को तिलक लगाकर इस दुनिया से विदा किया. रूपा दीदी वही हैं जिन्होंने वायरल वीडियो में हरीश से कहा था 'सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए जाओ.' उन्होंने हरीश की मृत्यु को एक 'आत्मा की मुक्ति' करार दिया जो 13 साल से शरीर रूपी पिंजरे में कैद थी.

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अंतिम विदाई का वो भावुक क्षण

रूपा दीदी ने बताया कि जब सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया तब उन्होंने हरीश के पास बैठकर 15-20 मिनट मेडिटेशन किया. उन्होंने हरीश के माथे पर तिलक लगाया और उनसे कहा कि वे अपने सभी 'कार्मिक अकाउंट' क्लियर करके सहजता से उड़ जाएं. उन्होंने कहा 'एक बहन अपने भाई को ऐसी विदाई नहीं देती.लेकिन हरीश के कल्याण के लिए उसे मुक्त करना जरूरी था.'

13 साल का 'मौन' दर्द और माता-पिता का त्याग 

रूपा दीदी के अनुसार, हरीश के माता-पिता 'मोहजीत राजा' बन गए हैं जिन्होंने अपने कलेजे के टुकड़े को मुक्त करने का इतना बड़ा और कठिन संकल्प लिया. उन्होंने हरीश के भाई की तुलना 'लक्ष्मण' से की जिसने 13 साल तक साये की तरह अपने बड़े भाई की सेवा की.

शरीर बन चुका था जख्मों का घर

अंतिम दिनों की स्थिति बयां करते हुए रूपा दीदी ने बताया कि हरीश का पूरा शरीर बेहद कमजोर हो चुका था. शरीर पर कई जगह गहरे जख्म हो गए थे. हड्डियां जवाब दे रही थीं और आंखों में विजन नहीं बचा था. इसी असहनीय पीड़ा को देखते हुए उनकी मां ने उन्हें 'पैसिव यूथेनेशिया' के जरिए मुक्ति दिलाने का साहसिक फैसला लिया.

माउंट आबू में दी जाएगी श्रद्धांजलि

रूपा दीदी ने बताया कि हरीश की आत्मा की शांति के लिए ब्रह्माकुमारीज़ के मुख्यालय, माउंट आबू में विशेष 'भोग' लगाया जाएगा. परिवार भी वहां जाकर हरीश के निमित्त परमात्मा को याद करेगा. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सुप्रीम कोर्ट के वकीलों का भी आभार व्यक्त किया जिन्होंने इस कठिन प्रक्रिया में परिवार का साथ दिया.