फ्रिज से जूस पिया तो पापा ने नंगा करके घर से निकाला था...कानपुर के वकील प्रियांशु ने मरने से पहले पिता को बताया ‘विलेन’, आखिरी नोट में ये लिखा

Kanpur News: कानपुर कचहरी में 25 वर्षीय वकील प्रियांशु श्रीवास्तव ने पिता की प्रताड़ना से तंग आकर पांचवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी. मरने से पहले लिखे आखिरी नोट में उन्होंने पिता को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके स्पर्श को भी मना कर दिया.

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यूपी तक

25 Apr 2026 (अपडेटेड: 25 Apr 2026, 12:51 PM)

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Kanpur News: कानपुर कचहरी में 25 साल के वकील प्रियांशु श्रीवास्तव की मौत से हड़कंप मचा हुआ है. प्रियांशु ने पांचवी मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी. लेकिन मरने से पहले उन्होंने एक सुसाइड नोट छोड़ा है जिसमें लिखी बातें पढ़कर हर किसी के रौंगटे खड़े हो गए. प्रियांशु ने अपनी मौत का जिम्मेदार पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव को ठहराते हुए एक इच्छा जाहिर की थी कि वो उनके शव को हाथ ना लगाएं. प्रियांशु के सुसाइड नोट में लिखे एक-एक शब्द ने उनके पिता को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है. 

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आखिरी नोट में लिखी ये इमोशनल बातें

प्रियांशु ने अपने दो पन्नों के व्हाट्सएप स्टेटस में उन यादों को उकेरा है जिन्हें वे बरसों से ढो रहे थे. उन्होंने बचपन के उस घटना का जिक्र किया जब फ्रिज से आम का जूस पीने के लिए उनके पिता ने उन्हें नंगा करके घर से बाहर निकाल दिया था. प्रियांशु ने लिखा कि उन्होंने कभी गलत रास्ता नहीं चुना. लेकिन पिता की अत्यधिक सख्ती ने उन्हें तोड़कर रख दिया है.

वकील होते हुए भी नहीं बन पाई खुद की पहचान

सबसे दर्दनाक पहलू प्रियांशु का अपना करियर था. पेशे से वकील होने के बावजूद उनके पास अपनी कोई पहचान नहीं थी. वे पिता के ही चैंबर में काम कर रहे थे जहां उन्हें न तो सम्मान मिला और न ही अपना कोई स्वतंत्र ऑफिस. दिन भर पिता की सेवा में जुटे रहने वाले इस युवा के भीतर एक गहरा खालीपन था. उन्होंने नोट में लिखा कि कैसे एक पिता के साये में रहकर भी वे पूरी जिंदगी कैद महसूस करते रहे.

घटना के बाद कानपुर कचहरी में सन्नाटा पसरा हुआ है. बार एसोसिएशन से लेकर साथी वकीलों तक हर कोई सदमे में है. डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता के अनुसार, प्रियांशु का व्हाट्सएप स्टेटस ही इस केस की सबसे बड़ी कड़ी है. पुलिस अब इसकी सत्यता और डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से पड़ताल कर रही है. वहीं, दूसरी ओर आरोपी पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव पूरी तरह टूट चुके हैं और इस स्थिति में नहीं हैं कि कोई जवाब दे सकें. फिलहाल यह घटना कानपुर कचहरी के हजारों वकीलों के लिए एक सबक और एक गहरा घाव छोड़ गई है.