UP News: क्या आप सोच सकते हैं कि जिस शख्स का कभी पढ़ाई में मन न लगा हो, जो कभी पहचान वालों के साथ ऑटो चलाता हो वा आज एक एयरलाइन शुरू करने जा रहा है. शंख एयरलाइंस के चेयरमैन श्रवण कुमार विश्वकर्मा ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है.
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कौन हैं श्रवण कुमार विश्वकर्मा?
श्रवण कुमार विश्वकर्मा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के रहने वाले हैं. उनके माता-पिता बाद में कानपुर के व्यापारिक केंद्र लाटूश रोड पर बस गए थे. यहां उनके पिता का लोहे का कारोबार था. पिता की मौत के बाद श्रवण ने उस बिजनेस को संभाला और बाद में लखनऊ को अपना ठिकाना बनाया. श्रवण बताते हैं कि पढ़ाई में मन न लगने के कारण उन्होंने शुरुआत में कई छोटे बिजनेस किए, ऑटो भी चलाया और कई बार फेल भी हुए.
सीमेंट से लेकर 400 ट्रकों के बेड़े तक, कारोबार का किया खूब विस्तार
श्रवण के कारोबारी सफर ने असली रफ्तार साल 2014 में पकड़ी जब उन्होंने सीमेंट के कारोबार में हाथ आजमाया. इसके बाद उन्होंने माइनिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में कदम रखा. कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने ट्रकों का एक बड़ा साम्राज्य खड़ा किया और आज उनके पास 400 से ज्यादा ट्रकों का बेड़ा है. श्रवण का मानना है कि विमान भी बस या टेंपो की तरह एक साधन मात्र है, इसे केवल लग्जरी आइटम नहीं समझना चाहिए.
शंख एयरलाइंस का आगाज, 15 जनवरी के आसपास से उड़ान
लगभग चार साल पहले श्रवण के मन में एविएशन सेक्टर में आने का विचार आया था. अब उनकी एयरलाइन शंख एयर 15 जनवरी के आसपास अपनी उड़ानें शुरू करने जा रही है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय से कंपनी को NOC मिल चुका है. शुरुआत तीन एयरबस विमानों के साथ होगी और अगले डेढ़ महीने में दो और विमान जुड़ेंगे.
लखनऊ इसका हेड ऑफिस है. पहले चरण में लखनऊ को दिल्ली, मुंबई और देश के अन्य मेट्रो शहरों के साथ-साथ यूपी के विभिन्न शहरों से जोड़ा जाएगा. कंपनी की योजना साल 2028 या 2029 तक अंतरराष्ट्रीय रूट पर जाने की है.
नाम शंख क्यों और क्या है खास?
श्रवण बताते हैं कि उनकी पैरेंट ट्रेडिंग कंपनी का नाम पहले से ही शंख था और इसका सांस्कृतिक महत्व भी है इसलिए एयरलाइन का नाम भी शंख रखा गया. उन्होंने दावा किया है कि उनकी एयरलाइन पीक सीजन या त्योहारों के दौरान टिकट के दाम नहीं बढ़ाएगी. फंडिंग के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि विमान लीज और फाइनेंस पर लिए गए हैं और उनके पास निवेश की कोई कमी नहीं है. श्रवण का लक्ष्य आम आदमी को कम किराए में हवाई यात्रा कराना और युवाओं के लिए रोजगार पैदा करना है.
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