Kanpur Gujaini Mazar Dispute: कानपुर के गुजैनी इलाके में घर के अंदर बने मंदिर के ठीक बगल कथित तौर पर मजार बनाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. एक दलित परिवार ने आरोप लगाया है कि उस पर मुस्लिम धर्म अपनाने का दबाव बनाया गया और विरोध करने पर परिवार के साथ मारपीट की गई. पीड़ित परिवार का दावा है कि उसकी पत्नी रीता को जबरन बुर्का पहनाने का दबाव भी बनाया गया. मामला सामने आने के बाद हिंदू संगठनों और बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ता थाने पहुंच गए और पुलिस कार्रवाई को लेकर हंगामा किया. पुलिस ने शिकायत के आधार पर समीम खान, वसीम, रीबू, शिबू, फुरखान, सोहेल खान और सुमित समेत कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है. पुलिस ने शिबू को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि चार अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने के बाद एक दरोगा को निलंबित कर दिया गया है और चौकी इंचार्ज की भूमिका की जांच के निर्देश दिए गए हैं.
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परिवार ने 40 हजार में खरीदी थी जमीन
पीड़ित सोनू जाटव मूल रूप से जालौन का रहने वाला बताया जा रहा है. सोनू के मुताबिक करीब दो साल पहले उसने गुजैनी इलाके में शिबू खान से 40 हजार रुपये में जमीन खरीदी थी. जमीन लेने के बाद उसने वहां एक कमरा बनवाया और पत्नी तथा तीन बच्चों के साथ रहने लगा. सोनू का कहना है कि घर बनाने के कुछ समय बाद उसके बच्चे अक्सर बीमार रहने लगे. इसी दौरान शिबू खान और उसके साथियों ने उससे अलग-अलग बातें करनी शुरू कीं. पीड़ित का आरोप है कि इसी दौरान उसके घर के कमरे में बने छोटे मंदिर के ठीक बगल एक मजार बना दी गई. शुरुआत में उसने इसका विरोध नहीं किया, लेकिन बाद में जब उसने मजार को हटाने की बात कही तो कथित तौर पर उसे धमकियां मिलने लगीं. सोनू का आरोप है कि उसे कहा गया कि मजार हटाने पर बड़ा विवाद खड़ा हो जाएगा और उसे मुस्लिम धर्म अपनाना पड़ेगा.
मजार को लेकर बढ़ता गया विवाद
सोनू के आरोपों के मुताबिक घर के अंदर मंदिर के बगल में मजार बनाए जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद लगातार बढ़ता गया. उसका कहना है कि उसने कई बार मजार को वहां से हटाने की बात कही, लेकिन उसे कथित तौर पर विरोध और धमकी का सामना करना पड़ा. यह मजार कब बनाई गई, इसे किसने बनाया और इसके पीछे वास्तव में क्या वजह थी, इन सवालों का जवाब पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा. वहीं पीड़ित सोनू ने आरोप लगाया है कि उस पर कथित दबाव सिर्फ मजार तक सीमित नहीं था. उसका दावा है कि उसकी पत्नी रीता को भी बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया जाने लगा. परिवार ने इसका विरोध किया तो विवाद और बढ़ गया. सोनू के मुताबिक उसने जब मजार हटाने की बात दोबारा उठाई तो दूसरे पक्ष के लोग नाराज हो गए. इसके बाद सोमवार रात कथित तौर पर शिबू खान और उसके साथियों ने उसके घर पर हमला कर दिया. सोनू का आरोप है कि हमलावरों ने उसके साथ-साथ उसकी पत्नी और तीनों बच्चों से भी मारपीट की. अचानक हुए इस घटना के बाद परिवार में अफरा-तफरी मच गई. सोनू इसके बाद शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचा, जहां उसने पूरी घटना की जानकारी दी.
'मजार मत तोड़ना, बड़ा बवाल हो जाएगा' का आरोप
सोनू का आरोप है कि जब वह चौकी इंचार्ज और थाने पहुंचा तो वहां मौजूद एक दरोगा ने उसकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करने के बजाय उसे मामला शांत रखने की सलाह दी. पीड़ित के मुताबिक, दरोगा ने उससे कहा, 'मामला ठंडा कर दो और मजार मत तोड़ना, वरना बड़ा विवाद हो जाएगा.' सोनू का आरोप है कि पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद उसने हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं को इसकी जानकारी दी. इसके बाद बजरंग दल समेत हिंदू संगठनों से जुड़े लोग मौके पर पहुंचे. उन्होंने परिवार से पूरी जानकारी ली और घर के अंदर बनी कथित मजार को देखा. इसके बाद कार्यकर्ता पुलिस के खिलाफ नाराजगी जताते हुए थाने पहुंचे और वहां हंगामा किया. मामला बढ़ने पर वरिष्ठ अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा.
पुलिस ने केस दर्ज किया
हंगामे और शिकायत के बाद पुलिस ने पीड़ित सोनू जाटव की शिकायत पर कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया. नामजद लोगों में समीम खान, वसीम, रीबू, शिबू, फुरखान, सोहेल खान और सुमित के नाम शामिल हैं. पुलिस ने मामले में शिबू को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं चार अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. DCP दीपेंद्र नाथ चौधरी के मुताबिक मामले में FIR दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है और चार अन्य लोगों से पूछताछ चल रही है. पुलिस अब शिकायत में लगाए गए धर्मांतरण के दबाव, मारपीट और मजार से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है. अधिकारियों के मुताबिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
पुलिसकर्मी पर हुई कार्रवाई
इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई है. पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि शिकायत लेकर पहुंचने के बावजूद शुरुआत में उसकी बात पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं की गई. मामले ने तूल पकड़ा तो वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी समीक्षा की. पुलिस ने कार्रवाई में लापरवाही के आरोप में एक दरोगा को निलंबित कर दिया है. वहीं चौकी इंचार्ज की भूमिका की जांच के निर्देश दिए गए हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी. फिलहाल पुलिस आरोपों की जांच के साथ इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर भी नजर रख रही है.
जन्माष्टमी पर मजार पर चादर चढ़ाने का दावा
सोनू ने एक और गंभीर आरोप लगाया है. उसका कहना है कि जन्माष्टमी के दिन उसके घर में भगवान कृष्ण की पूजा हो रही थी, तभी शिबू अपने साथियों के साथ वहां पहुंचा. सोनू का दावा है कि उसके विरोध के बावजूद कथित तौर पर मजार पर चादर चढ़ाई गई. पीड़ित के मुताबिक इसी घटना के बाद मंदिर और मजार को लेकर विवाद और गहरा गया. उसका कहना है कि उसने कई बार मजार को अपने घर से हटाने की बात कही, लेकिन कथित तौर पर उसे विरोध और धमकियों का सामना करना पड़ा. बाद में सोनू ने खुद मजार को तोड़कर अलग कर दिया. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मजार कब बनाई गई थी, इसे किसने बनाया और इसके निर्माण में कौन-कौन लोग शामिल थे.
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