नौकर से 309 किया संपर्क, 49 मैसेज डिलीट... कानपुर की करोड़पति बहू की कहानी में आया नया ट्विस्ट!

सिमर चावला

• 10:34 AM • 09 Sep 2026

कानपुर के करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कहानी में नए राज सामने आ रहे हैं. ससुर की मौत के बाद फूट-फूटकर रोती दिखाई दीं बहू शालू अब पुलिस की जांच के केंद्र में हैं.

Kanpur Vineet Minocha Murder

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Kanpur Vineet Minocha Murder: कानपुर के करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कहानी में नए राज सामने आ रहे हैं. ससुर की मौत के बाद फूट-फूटकर रोती दिखाई दीं बहू शालू अब पुलिस की जांच के केंद्र में हैं. पुलिस के मुताबिक, शालू और कारोबारी के पूर्व कर्मचारी तथा कथित सुपारी किलर विशाल गौतम के बीच लगातार संपर्क था. जांच में दोनों के बीच बातचीत के करीब 309 संपर्क सामने आए हैं. इनमें से 49 मैसेज डिलीट मिले हैं. अब पुलिस इन डिलीट संदेशों को रिकवर कराने की कोशिश कर रही है. जांच टीम को आशंका है कि अगर ये चैट वापस मिलती है तो हत्या की कथित साजिश से जुड़ी कुछ अहम कड़ियां सामने आ सकती हैं. यही डिजिटल सुराग अब इस हाईप्रोफाइल हत्याकांड की जांच को एक नया मोड़ दे रहा है.

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49 डिलीट मैसेज ने बढ़ाए पुलिस के सवाल

पुलिस की डिजिटल जांच में सामने आया कि शालू और विशाल गौतम के बीच हुई बातचीत के 49 संदेश डिलीट किए गए थे. मोबाइल की जांच के दौरान पुलिस को इन हटाए गए मैसेज की जानकारी मिली. अब तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से इन्हें दोबारा हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है. पुलिस के लिए ये संदेश इसलिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि इनके जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि दोनों के बीच किस तरह की बातचीत होती थी. फिलहाल यह साफ नहीं है कि डिलीट किए गए 49 संदेशों में क्या लिखा था. पुलिस इन्हें रिकवर करने के बाद बातचीत की पूरी कड़ी समझना चाहती है. अगर इन संदेशों में हत्या से पहले किसी योजना, निर्देश या अन्य महत्वपूर्ण बातचीत के संकेत मिलते हैं, तो जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है. हालांकि डिलीट चैट की वास्तविक सामग्री सामने आने के बाद ही उसकी भूमिका स्पष्ट हो सकेगी.

1 मई से हत्या तक करीब 309 बार संपर्क

डिलीट मैसेज के साथ ही शालू और विशाल के बीच लगातार संपर्क भी पुलिस की जांच में अहम बिंदु बन गया है. पुलिस की पड़ताल के मुताबिक, 1 मई से हत्या वाले दिन तक दोनों के बीच करीब 309 बार संपर्क हुआ. इसमें सामान्य फोन कॉल के साथ व्हाट्सऐप कॉल भी शामिल बताई जा रही हैं. अब जांच टीम इस पूरे संपर्क रिकॉर्ड को तारीख और समय के हिसाब से खंगाल रही है. पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि किस दिन दोनों के बीच कितनी बार बात हुई और बातचीत का पैटर्न कैसा था. खासतौर पर वारदात से पहले के दिनों और हत्या वाले दिन के संपर्क को अलग से देखा जा रहा है. जांच का फोकस इस बात पर भी है कि क्या हत्या से कुछ घंटे या कुछ दिन पहले दोनों के बीच बातचीत अचानक बढ़ी थी.

पुलिस तलाश रही इन सवालों के जवाब

जांच टीम के सामने इस समय कई सवाल हैं. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या की बात पहली बार दोनों के बीच कब हुई थी. क्या दोनों ने वारदात से पहले किसी खास योजना पर चर्चा की थी? क्या विशाल को किसी तरह के निर्देश दिए गए थे? हत्या के बाद क्या शालू और विशाल ने एक-दूसरे से संपर्क किया? पुलिस इन सभी सवालों के जवाब कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा से तलाश रही है. अधिकारियों के मुताबिक, संपर्क की संख्या अकेले किसी अपराध को साबित नहीं करती, लेकिन बातचीत के समय, अवधि और पैटर्न से जांच को दिशा मिल सकती है. इसी वजह से 309 संपर्कों और 49 डिलीट मैसेज की डिजिटल पड़ताल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पुलिस यह भी देख रही है कि सामान्य बातचीत और कथित साजिश से जुड़े संभावित संपर्कों में कोई अंतर दिखाई देता है या नहीं.

CCTV से शुरू हुई थी बहू और नौकर की कड़ी

विनीत मिनोचा की हत्या के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि फ्लैट के अंदर कौन आया और वारदात के बाद कौन बाहर निकला. इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए अपार्टमेंट में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई. गैलरी में लगे कैमरों में कारोबारी का पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम और उसका साथी राजकिशोर फ्लैट में आते-जाते दिखाई दिए. यहीं से पुलिस की जांच ने नया रुख लिया. विशाल कोई बाहरी या अनजान व्यक्ति नहीं था. वह पहले विनीत मिनोचा के यहां काम कर चुका था. इसके बाद पुलिस ने उसके पुराने संबंधों, परिचितों और कारोबारी के परिवार से उसके संपर्क की जानकारी जुटानी शुरू की. अपार्टमेंट के गार्ड से पूछताछ की गई और CCTV फुटेज को दोबारा देखा गया. इसके बाद विशाल के मोबाइल और संपर्कों की जांच हुई, जहां से शालू के साथ उसके संपर्क की कड़ी सामने आई.

पूर्व कर्मचारी विशाल पर पुलिस की नजर क्यों गई?

विशाल गौतम का इस परिवार से पुराना परिचय था. इसी वजह से पुलिस के लिए उसकी भूमिका जांच का अहम हिस्सा बनी. CCTV में उसकी मौजूदगी सामने आने के बाद पुलिस ने उसके मोबाइल रिकॉर्ड को खंगाला. इसी प्रक्रिया में शालू के साथ लगातार संपर्क की बात सामने आई. जांच टीम अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि विशाल और शालू के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत का स्वरूप क्या था. पुलिस के सामने यह भी सवाल है कि दोनों की बातचीत का कोई संबंध हत्या की घटना से था या नहीं. फिलहाल पुलिस 309 संपर्कों और डिलीट किए गए 49 मैसेज को दूसरे साक्ष्यों के साथ जोड़कर देख रही है. डिजिटल रिकॉर्ड के अलावा CCTV फुटेज और आरोपियों से हुई पूछताछ भी जांच का हिस्सा है.

ससुर की मौत पर रोती दिखी थीं शालू

विनीत मिनोचा की हत्या के बाद सामने आए वीडियो में शालू अपने ससुर की मौत पर बुरी तरह रोती हुई नजर आई थीं. घर के अंदर मातम का माहौल था और परिवार के लोग सदमे में थे. उस समय शुरुआती तौर पर यही तस्वीर सामने थी कि घर में घुसकर किसी ने कारोबारी की बेरहमी से हत्या कर दी. शालू के रोने और परिवार के सदमे के वीडियो भी सामने आए थे. लेकिन पुलिस ने भावनात्मक तस्वीरों को जांच का आधार नहीं बनाया. इसके बजाय CCTV फुटेज, मोबाइल डेटा, गार्ड से मिली जानकारी और आरोपियों से पूछताछ के जरिए मामले की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया गया. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस की नजर परिवार के एक सदस्य से जुड़े संपर्कों पर भी गई. अब 309 संपर्क और 49 डिलीट मैसेज ने मामले को और पेचीदा कर दिया है.

मुठभेड़ के बाद पकड़े गए विशाल और राजकिशोर

CCTV फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर पुलिस ने विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर की तलाश शुरू की थी. दोनों को रविवार देर रात पुलिस मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया गया. पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ के दौरान दोनों के पैर में गोली लगी. गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उनसे पूछताछ की. पुलिस का दावा है कि पूछताछ में दोनों ने कारोबारी की हत्या में अपनी भूमिका स्वीकार की और बहू शालू के कहने पर वारदात करने की बात बताई. इसी कथित बयान के बाद पुलिस ने मामले में सुपारी किलिंग के एंगल को भी गंभीरता से जांचना शुरू किया. हालांकि आरोपियों के कथित बयानों को अदालत में स्वतंत्र रूप से साबित किया जाना अभी बाकी है. पुलिस अब उनके बयान को डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों से मिलाने में जुटी है.

चाकू से किए गए थे 26 से ज्यादा वार

पूरा मामला कानपुर के कल्याणपुर क्षेत्र स्थित इंदिरानगर के रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट का है. यहां पहली मंजिल के फ्लैट नंबर C-104 में 63 वर्षीय दवा कारोबारी विनीत मिनोचा रहते थे. शनिवार देर रात उनकी चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई. पुलिस के मुताबिक, हत्यारों ने कारोबारी पर चाकू से 26 से ज्यादा वार किए थे. वारदात के समय विनीत फ्लैट में अकेले थे. रविवार सुबह करीब चार बजे उनका बेटा और बहू पार्टी से घर लौटे, तब घर के अंदर हत्या का पता चला. सूचना मिलने के बाद पुलिस कमिश्नर फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की. इसके बाद अपार्टमेंट के CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई और संदिग्धों की पहचान की दिशा में काम शुरू हुआ.

5 बड़े दवा कारोबारियों में गिने जाते थे विनीत

विनीत मिनोचा शहर के प्रमुख दवा कारोबारियों में माने जाते थे. पुलिस जांच में सामने आए विवरण के मुताबिक, उन्हें कानपुर के पांच बड़े दवा कारोबारियों में गिना जाता था. उनकी हत्या के बाद मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि वारदात सामान्य चोरी या किसी बाहरी हमलावर की घटना से आगे जाती दिखाई दी. पुलिस ने पहले यह पता लगाने की कोशिश की कि फ्लैट में कौन दाखिल हुआ था. CCTV में विशाल गौतम और राजकिशोर की मौजूदगी सामने आने के बाद जांच ने पुराने कर्मचारी तक पहुंच बनाई. इसके बाद मोबाइल डेटा और संपर्क रिकॉर्ड ने मामले में परिवार से जुड़ी एक नई कड़ी जोड़ दी. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि विशाल का शालू से संपर्क किस वजह से था और क्या यह संपर्क हत्या की कथित साजिश से जुड़ा था.

 बहू और विशाल के बीच संपर्क बना अहम सुराग

इस हत्याकांड में शालू और विशाल के बीच 1 मई से वारदात वाले दिन तक करीब 309 संपर्क सामने आने के बाद पुलिस की जांच का एक बड़ा हिस्सा डिजिटल साक्ष्यों पर केंद्रित हो गया है. पुलिस यह नहीं देख रही कि केवल कितनी बार बातचीत हुई, बल्कि यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि किस समय संपर्क हुआ और कितनी देर तक बातचीत चली. वारदात से पहले के संपर्कों को खास तौर पर देखा जा रहा है. इसके साथ ही 49 डिलीट मैसेज को रिकवर करने की कोशिश की जा रही है. अगर इन संदेशों से कोई अहम जानकारी सामने आती है तो वह पुलिस के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकती है. हालांकि फिलहाल डिलीट चैट की सामग्री सामने नहीं आई है और इसलिए उसमें क्या था, इस बारे में कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी.

क्या 49 मैसेज में छिपा है हत्या का राज?

पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि आखिर वे 49 मैसेज क्यों डिलीट किए गए थे और उनमें क्या बातचीत हुई थी. क्या उनमें हत्या से पहले की कोई योजना थी, क्या किसी तरह का निर्देश दिया गया था या फिर वे सामान्य बातचीत का हिस्सा थे? इन सवालों का जवाब डिजिटल फॉरेंसिक जांच के बाद ही सामने आएगा. पुलिस कॉल रिकॉर्ड को भी इसी वजह से तारीख और समय के हिसाब से देख रही है. खासतौर पर हत्या वाले दिन और उससे पहले के दिनों में हुए संपर्कों पर नजर है. जांच अधिकारी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि वारदात के बाद शालू और विशाल के बीच कोई संपर्क हुआ था या नहीं. इस पूरी प्रक्रिया का मकसद डिजिटल डेटा को दूसरे साक्ष्यों के साथ मिलाकर घटनाक्रम की सही तस्वीर तैयार करना है.

पुलिस की जांच अब डिजिटल सबूतों पर टिकी

मामले में फिलहाल CCTV फुटेज, मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड और आरोपियों से हुई पूछताछ को एक साथ जोड़कर देखा जा रहा है. पुलिस के अनुसार, विशाल और राजकिशोर की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में बहू शालू की कथित भूमिका सामने आई. इसके बाद शालू से जुड़ी जानकारी और उनके मोबाइल डेटा की भी जांच की गई. अब 49 डिलीट मैसेज और 309 संपर्क इस जांच के नए केंद्र में हैं. पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी एक सुराग के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय सभी उपलब्ध साक्ष्यों को आपस में मिलाया जाए. अगर डिजिटल डेटा से कोई ठोस जानकारी मिलती है तो हत्या की कथित साजिश की कड़ी और स्पष्ट हो सकती है. फिलहाल जांच जारी है.